Comments on: भीमबेटका शैलाश्रय एवं प्रागैतिहासिक गुफा चित्र https://inditales.com/hindi/bhimbetka-prachin-shail-chitra/ श्रेष्ठ यात्रा ब्लॉग Sat, 15 May 2021 11:22:49 +0000 hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.4 By: Anushka Bhalerao https://inditales.com/hindi/bhimbetka-prachin-shail-chitra/#comment-819 Sat, 15 May 2021 11:22:49 +0000 https://inditales.com/hindi/?p=2235#comment-819 Sundar varnan, us sthan pr na jaakr bhi esa lag raha he jese ab vaha k baare me hum jaante he, or ab jab jaenge to iss baare me hume jankari bhi rahegi.

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By: Anuradha Goyal https://inditales.com/hindi/bhimbetka-prachin-shail-chitra/#comment-812 Mon, 19 Apr 2021 04:22:15 +0000 https://inditales.com/hindi/?p=2235#comment-812 In reply to Chandrahas Shikkenavis.

धन्यवाद चंद्रहास जी

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By: Chandrahas Shikkenavis https://inditales.com/hindi/bhimbetka-prachin-shail-chitra/#comment-809 Thu, 15 Apr 2021 13:40:34 +0000 https://inditales.com/hindi/?p=2235#comment-809 अनुराधाजी एवं मीताजी
अत्यंत सुंदर लेख जो बहुत ही माहिती पूर्ण और अचंभित करने वाला है.वाकणकरजी की सुंदर खोज को आपने शब्दों में व्यक्त किया है. दस हजार वर्ष पूर्व सागर भोपाल के पास तक था जानकर आश्चर्य हुआ.
पानी के द्वारा तराशी गई शिलाऐं और महाभारत के भीम के नाम पर नामांकित भीमबेटका तथा वहां की गुफाओं का सुंदर वर्णन मन को छूने वाला है.
इतनी पुरानी सुंदर चित्रकारी वहां की विकसित सभ्यताओं का द्योतक है.युध्द के मैदान में अश्व और पैदल दल की चित्रकारी इस शताब्दी के युद्ध कौशल से मिलती है.
सदियों तक वैसे के वैसे ही स्थिति में रहने वाले रंग और कुछ रंगो पर तो धूल भी नहीं टिकती. आज के आधुनिकता के लेमिनेटेड पेंट से मिलती है.याने कि उस समय की सभ्यताएं कितनी विकसित होंगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. सुंदर आलेख हेतु धन्यावाद.

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By: Pradeep Khopkar https://inditales.com/hindi/bhimbetka-prachin-shail-chitra/#comment-804 Sun, 11 Apr 2021 05:56:13 +0000 https://inditales.com/hindi/?p=2235#comment-804 अनुराधा जी, मीता जी,
सदियों पुरानी भीमबेटका गुफ़ाओं की सुंदर एवम् सटीक जानकारी प्रदान करता पठनीय आलेख ! यह आश्चर्य की बात है कि लगभग दस हज़ार वर्ष पूर्व ज्यामितीय आकृतियों से चित्रित चित्रों के रंग आज भी जैसे ताज़े है और यह भी आश्चर्यजनक है कि उस समय भी लोगों को ज्यामिती का ज्ञान था ।आपका कथन सही है,उस समय के चित्रकारों को शायद यह कल्पना भी नहीं होगी कि कालान्तर में उनके ये चित्र उस समय के सामाजिक परिवेश,जीवन शैली आदि से आने वाली नस्लों का परिचय करवायेंगे ।भीमबेटका गुफ़ाएँ वास्तव में भारत की सार्वधिक पुरातन मानवी धरोहर है । ये जानकारी और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं क्योंकि यें गुफाएँ मेरे अपने राज्य मध्यप्रदेश में स्थित है तथा इनके खोजकर्ता पद्मश्री (स्व) डॉ. वाकणकर जी, मेरे ही शहर उज्जैन से थे !
सुंदर आलेख हेतु धन्यवाद ।

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