गाँधी यात्रा Archives - Inditales श्रेष्ठ यात्रा ब्लॉग Mon, 12 Jun 2023 05:11:15 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.4 महात्मा गाँधी स्मारक – भारत भर में फैले उनके घर, आश्रम, कारावास https://inditales.com/hindi/mahatma-gandhi-samarak-across-india/ https://inditales.com/hindi/mahatma-gandhi-samarak-across-india/#respond Wed, 29 Jan 2020 02:30:33 +0000 https://inditales.com/hindi/?p=1685

कल्पना कीजिए यदि महात्मा गाँधी स्वयं आपको अपने जीवन के महत्वपूर्ण स्थानों पर ले जाना चाहें तो वे आपको कहाँ कहाँ ले जाएंगे? महात्मा गाँधी ने अपने जीवनकाल में अनेक यात्राएं की थी। आज के समान यदि उस समय भी हर ओर सोशल मीडिया का बोलबाला होता तो उन्होंने ‘सर्वाधिक भ्रमण किया हुआ व्यक्ति’ की […]

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कल्पना कीजिए यदि महात्मा गाँधी स्वयं आपको अपने जीवन के महत्वपूर्ण स्थानों पर ले जाना चाहें तो वे आपको कहाँ कहाँ ले जाएंगे? महात्मा गाँधी ने अपने जीवनकाल में अनेक यात्राएं की थी। आज के समान यदि उस समय भी हर ओर सोशल मीडिया का बोलबाला होता तो उन्होंने ‘सर्वाधिक भ्रमण किया हुआ व्यक्ति’ की उपाधि अवश्य अर्जित कर ली होती।

महात्मा गाँधी आप भारत के किसी भी कोने में पहुँच जाएँ, आपको गाँधीजी के अस्तित्व का आभास अवश्य  होगा। उनकी यात्रा के स्मारक, उनके भाषण के अंश, किसी बैठक की स्मृति, शहर के किसी मार्ग का नामकरण, उनकी स्मृति में निर्मित कोई इमारत, कोई योजना। उनके द्वारा भ्रमण किए सभी स्थानों की यात्रा करना हम जैसे साधारण व्यक्तियों के लिए असाधारण चुनौती के समान है।

भारत में महात्मा गाँधी के सर्वशक्तिमान उपस्थिति का सर्वाधिक विशाल प्रमाण है महात्मा गांधी मार्ग । मेरे अनुमान से कदाचित भारत का कोई ऐसा नगर नहीं होगा जहां महात्मा गाँधी मार्ग नहीं हो। हो सकता है किसी नगरी में कोई मार्ग किसी अन्य के नाम से लोकप्रिय हो, तथापि उसका सरकारी नाम महात्मा गाँधी मार्ग हो।

गाँधी जयंती एवं ३० जनवरी उनकी स्मृति में सम्पूर्ण भारत में मनाया जाने वाला पर्व हैं।

महात्मा गाँधी समारक भारत भर में

गाँधी जी रेल से यात्रा करते थे तो आईए भारत के उन सभी स्थलों का भ्रमण करें जिनका किसी ना किसी प्रकार से गांधीजी से संबंध रहा हो।

गुजरात

गुजरात महात्मा गाँधी का जन्म प्रदेश है। उन्होंने अपना सम्पूर्ण बालपन यहीं व्यतीत किया था। उन्होंने अपने आश्रम की भी स्थापना यहाँ की थी। स्वाभाविक है, गुजरात में उनसे संबंधित अनेक स्थान होंगे।

पोरबंदर – महात्मा गाँधी का जन्मस्थान

पोरबंदर गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र का एक बंदरगाह नगर है। वर्तमान में यह मोहनदास करमचंद गाँधी के जन्मस्थान के रूप में अधिक लोकप्रिय है। उनका पैतृक निवास जनता के दर्शनों हेतु खुला है। श्वेत एवं हरित रंग में रंगे उनके विशाल निवास के आप दर्शन कर सकते हैं। आप न केवल उनके जन्म का कक्ष देखेंगे, अपितु अतीतकाल के निवास कितने वैभवशाली होते थे, इसका भी अनुभव प्राप्त करेंगे।

पोरबंदर का कीर्ति मंदिर - गाँधी जी का जन्म स्थान
पोरबंदर का कीर्ति मंदिर – गाँधी जी का जन्म स्थान

निवास स्थान के समीप एक विशाल कीर्ति मंदिर है जो गाँधीजी एवं कस्तूरबाजी को समर्पित है। यहाँ एक प्रदर्शन दीर्घा है जहां चित्रों के रोचक मिश्रण द्वारा गाँधीजी के बालपन से लेकर धोती धारण किए महात्मा तक के उनकी यात्रा का प्रदर्शन किया गया है। ये चित्र गाँधीजी के जीवन काल के समय आम जीवन शैली की भी कथाएं कहती हैं।

अवश्य पढ़ें: पोरबंदर – गांधी एवं सुदामा की नगरी

कस्तूरबा का पैतृक निवास गांधी-निवास के ठीक पीछे है।

अधिक लोगों को यह जानकारी नहीं है कि पोरबंदर श्री कृष्ण के परम मित्र सुदामा का भी गाँव था।

राजकोट

गाँधी जी के बचपन का चित्र
गाँधी जी के बचपन का चित्र

गाँधी ने अपना बालपन राजकोट में बिताया जहां उनके पिता दीवान थे। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा राजकोट में पूर्ण की थी।

वकालत की शिक्षा प्राप्त करने के लिए यहाँ से वे लंदन चले गए। वहाँ से दक्षिण अफ्रीका जाने से पूर्व वे कुछ समय के लिए वापिस आए थे। दक्षिण अफ्रीका में २१ वर्ष बिताकर अंततः वे १९१५ में भारत वापिस लौटे।

मेरी राजकोट यात्रा अब तक शेष है। अतः वहाँ का भ्रमण करने के पश्चात इस खंड को और समृद्ध करूंगी।

अहमदाबाद

सत्याग्रह आश्रम कोचरब

सत्याग्रह आश्रम कोचरब - अहमदाबाद
सत्याग्रह आश्रम कोचरब – अहमदाबाद

१९१५ में दक्षिण अफ्रीका से भारत वापिस लौटने के पश्चात गाँधीजी जहां सर्वप्रथम निवास करने आए, वह था अहमदाबाद के कोचरब में  बेरिस्टर जीवनलाल देसाई का बंगला। यह एक विशाल दुमंजिला बंगला था जिससे जुड़ा हुआ एक विशाल प्रांगण था। इसे अब सत्याग्रह आश्रम कहा जाता है। किन्तु यह एक संग्रहालय अधिक है। यहाँ गांधी जी से संबंधित साहित्यों से परिपूर्ण एक पुस्तकालय भी है।

अवश्य पढ़ें: कोचरब का सत्याग्रह आश्रम

साबरमती आश्रम

साबरमती आश्रम अहमदाबाद
साबरमती आश्रम अहमदाबाद

साबरमती आश्रम गांधीजी से जुड़ा कदाचित सर्वाधिक लोकप्रिय तथा सर्वाधिक भ्रमण किया गया स्थल है। यह आश्रम साबरमती नदी के तट पर स्थित है। उस समय यह स्थान अहमदाबाद के बाहरी क्षेत्र में स्थित था, किन्तु आज यह अहमदाबाद नगर के लगभग मध्य आ गया है। इस निर्मल आश्रम का प्रत्येक भाग गांधीजी का स्मरण करता है जहां उन्होंने १९१७ से १९३० तक निवास किया था। भित्तियों पर उनके व्यक्तव्य उल्लेखित हैं।

अवश्य पढ़ें: अहमदाबाद का साबरमती आश्रम

१९३० में गांधीजी का प्रसिद्ध नमक सत्याग्रह एवं दांडी यात्रा यहीं  से आरंभ हुई थी। यहाँ स्थित संग्रहालय १९६० में वास्तुविद चार्ल्स कोरिया ने बनाया था। प्रातः एवं संध्या के समय यहाँ भजन गाए जाते हैं जिनका निर्मल आनंद आप अवश्य उठायें।

गुजरात विद्यापीठ

इस विद्यापीठ की स्थापना गांधीजी ने १९२० में राष्ट्रीय विद्यापीठ के रूप में की थी। उन्होंने जीवन के अंत तक यहाँ कुलाधिपति के रूप में सेवाएं प्रदान कीं। यह विद्यापीठ कोचरब में सत्याग्रह आश्रम के समीप स्थित है। मुझे यहाँ स्थित पुस्तक की दुकान अत्यन्त भा गई थी। भारतीय पुस्तकों का यहाँ अद्भुत भंडार है।

महाराष्ट्र में गांधी जी से संबंधित स्थल

वर्धा का मगनवाड़ी आश्रम

वकील मोहनदास करमचंद गाँधी
वकील मोहनदास करमचंद गाँधी

१९३० की घटनाओं के पश्चात गांधीजी ने वर्धा में एक आश्रम की स्थापना की थी। उसका नामकरण उन्होंने एक ग्रामीण वैज्ञानिक एवं परम मित्र मगन गांधी पर किया था। ग्रामीण उद्योगों एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए यहाँ अखिल भारतीय ग्रामोद्योग संघ की भी स्थापना की गई।

इस संकुल में स्थित मगन संग्रहालय में खादी एवं अन्य ग्रामीण उद्योगों के उत्पादों का भी एक खंड है। एक प्रकार से आप इसे आधुनिक भारत की प्रथम उद्यमिता कह सकते हैं।

मुंबई का मणि भवन

मुंबई का मणि भवन संग्रहालय
मुंबई का मणि भवन संग्रहालय

गांधीजी ने जितना भ्रमण किया है, कदाचित हममें से कोई अनुमान भी नहीं लगा सकता। उन्होंने मुंबई में भी व्यापक भ्रमण किया था। मुंबई में रेवाशङ्कर जगजीवन झवेरी का बंगला उनका निवास स्थान बना। १९४२ में यहाँ उन्होंने अगस्त क्रांति मैदान से भारत छोड़ो आंदोलन एवं रोलेट ऐक्ट के विरुद्ध आंदोलन छेड़ा था। हम यही वास्तु ‘मणि भवन’ के नाम से जानते हैं।

अवश्य पढ़ें: मुंबई का मणि भवन

आज मणि भवन एक सुंदर संग्रहालय बन गया है। यहाँ गांधीजी से संबंधित साहित्यों, चित्रों एवं कलाकृतियों का अनमोल संग्रह है। चित्रावली की एक दीर्घा उनकी जीवनी को पुनर्जीवित करती है।

पुणे का आगा खान महल

पुणे स्थित आगा खान महल - गाँधी जी का कारवास
पुणे स्थित आगा खान महल – गाँधी जी का कारवास

आगा खान पैलिस अर्थात महल गांधीजी का कारागृह था। वे यहाँ कस्तूरबा, अपने सचिव एवं सहयोगी सुश्री सरोजिनी नायडू के संग बंदी थे। कस्तूरबा एवं सचिव का निधन भी यहीं हुआ था। इसी संकुल में उनकी समाधियां हैं।

और पढ़ें: पुणे का आगा खान महल

एक समय यह आगा खान द्वारा निर्मित महल था जो अब महात्मा को समर्पित संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया गया है। यह एक विशाल महल है जो आधुनिक भी है। यहाँ के बगीचे में टहलते हुए मैं सोच रही थी कि क्या कारागृह ऐसे होते थे?

दिल्ली में महात्मा गाँधी से जुड़े स्थान

गांधी स्मृति अर्थात बिड़ला हाउस दिल्ली

पारंपरिक वेशभूषा में गाँधी जी
पारंपरिक वेशभूषा में गाँधी जी

नई दिल्ली के तीस जनवरी मार्ग पर स्थित बिड़ला हाउस में गांधीजी ने अपने जीवन के अंतिम १४४ दिवस बिताए थे। ‘हे राम’ कहते हुए यहीं उन्होंने अपना अंतिम श्वास लिया था। यह इमारत बिड़ला परिवार की थी जिसे घनश्यामदास बिड़ला ने १९२८ में बनवाया था। संग्रहालय के लिए प्रारंभ में बिड़ला परिवार इस इमारत पर से अपना स्वामित्व त्यागने का इच्छुक नहीं था। कालांतर में १९७३ में उन्होंने इस इमारत का त्याग किया। तत्पश्चात यहाँ गांधीजी को समर्पित एक बहुमाध्यम संग्रहालय निर्मित किया गया।

राज घाट

गांधीजी से संबंधित अंतिम स्थान है उनका समाधि स्थल। यह एक सादा स्मारक है जो घास के बड़े मैदानों से घिरा हुआ है। हम सभी ने इस स्थान को प्रत्यक्ष रूप से भले ही ना देखा हो, किन्तु दूरदर्शन पर इसे अवश्य देखा है जब गणमान्य व्यक्ति यहाँ आकर गांधीजी की समाधि पर पुष्प-हार चढ़ाते हैं। यह दिल्ली का एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया है।

भारत के अन्य स्थानों में स्थित महात्मा गांधी स्मारक

मोतीहारी, बिहार में गांधी संग्रहालय

१९१७ में किया गया चंपारण सत्याग्रह गांधीजी के जीवन की सर्वोच्च उपलब्धि थी। ब्रिटिश सरकार द्वारा बलपूर्वक उगायी गई नील की खेती के विरुद्ध उन्होंने प्रथम आंदोलन का प्रतिनिधित्व किया था। गांधी संग्रहालय में १९१७ की इसी घटना का चित्रों द्वारा उत्सव मनाया गया है। जिस स्थान पर गांधीजी की न्यायालय में प्रस्तुति हुई थी, उस स्थान पर अब गांधी स्मारक स्तंभ खड़ा है।

सामान्य ज्ञान – ‘Animal farm and 1984’ द्वारा प्रसिद्धि प्राप्त जॉर्ज ऑरवेल का जन्म मोतीहारी में हुआ था।

कन्याकुमारी का गांधी स्मारक मंडपम

गाँधी समरक कन्याकुमारी
गाँधी समरक कन्याकुमारी

समुद्र किनारे स्थित कन्याकुमारी मंदिर के एक ओर गांधीजी का स्मारक है। गांधीजी १९२५ एवं १९३७ में, दो बार कन्याकुमारी आए थे। यह स्मारक उनकी इन्ही यात्राओं की स्मृति में है। उनकी मृत्यु के पश्चात उनकी अस्थि अवशेष का एक भाग यहाँ जनता के दर्शनार्थ रखा गया था। तत्पश्चात समुद्र में उसका विसर्जन किया गया था।

१९५६ में निर्मित इस स्मारक के वास्तुशिल्प की विशेषता यह है कि २ ऑक्टोबर के दिन सूर्य की किरणें ठीक उस स्थान पर पड़ती हैं जहां गांधीजी के अस्थि अवशेष रखे गए थे। छत पर बने एक छिद्र द्वारा सूर्य की किरणें भीतर पहुँचती हैं। इस स्मारक की ७९ फुट की ऊंचाई गांधीजी के ७९ वर्षों की आयु दर्शाती है।

मदुरै का गांधी संग्रहालय

गांधीजी के जीवन में मदुरै का विशेष महत्व है। यह वही स्थान है जहां उन्होंने अपने सदैव के वस्त्रों का त्याग कर शेष जीवन इकलौती धोती धारक का अवतार ग्रहण किया था। गांधीजी की मृत्यु के समय जो रक्त रंजित वस्त्र उन्होंने धारण किए थे, उनकी स्मृति में उनके वे वस्त्र यहाँ सहेज कर रखे गए हैं। इस संग्रहालय में महात्मा की जीवनी पर आधारित एक दृश्य-श्रव्य पुस्तकालय भी है।

महात्मा गाँधी साबरमती आश्रम, मणि भवन, सत्याग्रह आश्रम, बिड़ला भवन इत्यादि उनसे संबंधित सभी स्थानों में उनका कक्ष एक समान ही प्रदर्शित किया गया है। एक सर्वसाधारण कक्ष जहां उनका करघा, उनकी खड़ाऊ, उनका  गोलाकार चश्मा एवं कुछ पुस्तकें रखी हुई हैं। मैं सोचने पर बाध्य हो जाती हूँ कि क्या वास्तव में उनका कक्ष ऐसा ही होता था अथवा निर्माता प्रत्येक संग्रहालय में एक ही ढांचे का पालन करते थे?

मैंने अब तक दक्षिण अफ्रीका का भ्रमण नहीं किया है। आशा है वहाँ स्थित गांधीजी की धरोहरों के भी शीघ्र दर्शन कर सकूँ।

क्या आप भारत में स्थित व गांधीजी से  संबंधित अन्य स्थानों के विषय में जानते हैं जिनका उल्लेख करने से मैं चूक गई हूँ तो मुझे अवश्य बताएं। प्रतीक्षारत।

अनुवाद: मधुमिता ताम्हणे

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पोरबंदर- सुदामा व गांधी की जन्मस्थली https://inditales.com/hindi/porbandar-gandhi-sudama-janamsthal/ https://inditales.com/hindi/porbandar-gandhi-sudama-janamsthal/#respond Wed, 15 May 2019 02:30:13 +0000 https://inditales.com/hindi/?p=1316

पोरबंदर – यह शब्द मेरे कानों में सर्वप्रथम तब पड़ा जब प्राथमिक शाला में हमें महात्मा गांधी पर निबंध लिखने कहा गया था। पोरबंदर की तो छोड़िये, चंडीगड़ में पढ़ रही मुझ जैसी नन्ही बालिका के लिए गुजरात भी एक सुदूर स्थान था। बड़े होते होते मेरे भूगोल की सीमाएं भी बढ़ने लगीं। फिर आया […]

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पोरबंदर – यह शब्द मेरे कानों में सर्वप्रथम तब पड़ा जब प्राथमिक शाला में हमें महात्मा गांधी पर निबंध लिखने कहा गया था। पोरबंदर की तो छोड़िये, चंडीगड़ में पढ़ रही मुझ जैसी नन्ही बालिका के लिए गुजरात भी एक सुदूर स्थान था। बड़े होते होते मेरे भूगोल की सीमाएं भी बढ़ने लगीं। फिर आया इन्टरनेट अर्थात् संगणक जाल का युग। मेरे कुछ भ्रमणप्रिय साथियों ने पोरबंदर के दर्शन किये तथा इन्टरनेट द्वारा मुझे गांधीजी के उस घर के चित्र भेजे जहां उनका जन्म हुआ था। उस घर के चटक हरे चौखटों ने मेरे मानसपटल पर अमिट छाप छोड़ दी थी और तभी मैंने ठान लिया था कि भविष्य में कभी ना कभी उस घर के दर्शन अवश्य करूंगी।

कीर्ति मंदिर - पोरबंदर गुजरात
कीर्ति मंदिर – पोरबंदर गुजरात

हाल ही में जब मैंने द्वारका की यात्रा की थी, मुझे पोरबंदर होकर जाना पड़ा था। तभी मैंने निश्चय किया था कि इसी यात्रा में, विश्व को दो महान सुपुत्र प्रदान करने वाले पोरबंदर को जितना हो जानने का प्रयत्न करुँ। मोहनदास करमचंद गांधी तथा सुदामा के कारण प्रसिद्धी को प्राप्त पोरबंदर एक छोटा सा नगर होगा, ऐसा मेरा अनुमान था। किन्तु जब मेरा विमान पोरबंदर विमानतल पर उतरने हेतु नीचे आया, समक्ष बहुमंजिली इमारतों तथा हवाई पुलों से भरे एक विशाल नगर को देख मेरी आँखें फटी की फटी रह गयीं।

द्वारका की ओर जाते जाते मैंने एक विमार्ग लेते हुए पोरबंदर की ओर प्रस्थान किया। वहां पहुंचकर मैंने सर्वप्रथम महात्मा गाँधी के जन्म स्थल को देखने का निश्चय किया। कीर्ति मंदिर के नाम से पहचाने जाने वाला यह स्थल पोरबंदर का सर्वाधिक प्रसिद्द तथा सर्वाधिक प्रदर्शित स्थल है। बाजार के समीप हमने अपनी गाड़ी खड़ी की तथा चारों ओर अपनी दृष्टी दौड़ाई। अधिकांशतः दुकानों में मसालों की विक्री हो रही थी। बाजार के चारों ओर विशाल तथा अलंकृत इमारतें थीं। इन्हें देखकर पोरबंदर एक अति समृद्ध तथा संपन्न नगर प्रतीत हुआ।

पोरबंदर का कीर्ति मंदिर

गांधीजी के जन्मस्थान के दर्शन से पूर्व क्यों ना हम उनसे सम्बंधित ऐतिहासिक तथ्यों को पुनः स्मरण करें!

गांधीजी का इतिहास

कीर्ति मंदिर पोरबंदर में गाँधी जी के चित्र
कीर्ति मंदिर पोरबंदर में गाँधी जी के चित्र

पोरबंदर के जिस घर में गांधीजी का जन्म हुआ था, उसे उनके परदादा श्री हरजीवनजी रहिदासजी गाँधी ने खरीदा था। एक स्थानीय कुलीन स्त्री मनबा जी से खरीदा गया यह घर उस समय एक-मंजिला घर था। गांधीजी के जन्म दिवस, २ अक्टोबर १८६९ तक यह छोटा सा घर एक तिमंजिली इमारत में परिवर्तित हो गया था। यहाँ लगे एक सूचना पटल पर दी गयी जानकारी अनुसार इस इमारत के भीतर सर्व कक्ष तथा गलियारे मिलाकर कुल २२ कक्ष हैं।

गांधीजी के पिता व दादा पोरबंदर के राजदरबार में (राजाओं के) दीवान थे। यह एक प्रतिष्ठित पदवी थी। उनकी यह भव्य हवेली इसका जीता जागता उदाहरण है।

गांधीजी के विषय में और अधिक जानना चाहें तो गाँधी विरासती सूचना पटल पर पा सकते हैं।

कीर्ति मंदिर – पोरबंदर का गाँधी निवास

गाँधी निवास पोरबंदर
गाँधी निवास पोरबंदर

गांधीजी का मूल निवास स्थान इस विशाल व अलंकृत कीर्ति मंदिर के बाईं ओर स्थित है। समक्ष ही नवीन से प्रतीत होते हुए एक सादे भित्त पर लिखा था – महात्मा गाँधी का जन्म स्थान। इसके भीतर प्रवेश करते ही आप स्वयं को हरे रंग के किनार वाली ऊंची भित्तियों से घिरे प्रांगण में पायेंगे। निवास स्थान का मुख्य प्रवेश-द्वार दाहिनी ओर है। गृह के अग्र भाग पर स्थित गलियारे में हरे रंग के कई स्तंभ तथा नक्काशीयुक्त लकड़ी के चौखट हैं।

प्रवेश द्वार पर अंकित गणपति - कीर्ति मंदिर - पोरबंदर
प्रवेश द्वार पर अंकित गणपति – कीर्ति मंदिर – पोरबंदर

मुख्य द्वार के ऊपर ही गांधीजी तथा कस्तूरबा का एक श्वेत-श्याम चित्र लटका हुआ है। द्वार के चौखट पर महीन नक्काशी की गयी है। बारीकी के निरिक्षण करने पर मुझे लाल रंग में गणेश जी दिखाई दिए। कोष्ठक के रूप में दोनों ओर लकड़ी के तोते लटके हुए हैं। कक्ष के भीतर प्रवेश करते ही आप गांधीजी के जन्म का सटीक स्थान देख सकते हैं। यह स्थान स्वास्तिक द्वारा इंगित किया गया है। समीप ही भित्ति के ऊपर उनका एक विशाल चित्र भी लटका हुआ है। मुझे किंचित आश्चर्य हुआ कि कक्ष के भीतर ही सही, किन्तु द्वार के इतने समीप गांधीजी की माता ने उन्हें जन्म दिया होगा! जाने दीजिये, मुझे इसकी जानकारी नहीं। अतः अनावश्यक टिप्पणी करना उचित नहीं।

गाँधी जी का जन्म स्थल
गाँधी जी का जन्म स्थल

मैंने घर को सूक्ष्मता से निहारना आरम्भ किया। मुझे कुछ झरोखे दृष्टिगोचर हुए जो भले ही छोटे थे किन्तु बारीकी से तराशे हुए थे। छोटी छोटी कई अलमारियां थीं जिन पर हरे रंग के द्वार थे तथा उनके चारों ओर की दीवारें लाल रंग की थीं। दीवारों पर कई आले भी थे जो रंग बिरंगे चित्रों द्वारा अलंकृत थे। इन सर्व चित्रों मैं तोतों के प्रति चित्रकार के विशेष लगाव ने मेरा ध्यान आकर्षित किया। तोता यहाँ के कारीगरों व चित्रकारों का प्रिय विषय प्रतीत हुआ।

गाँधी निवास की चित्रित दीवारें
गाँधी निवास की चित्रित दीवारें

गृह के भीतर ऊपरी मंजिल तक जाने-आने हेतु लकड़ी की लगभग खड़ी सीड़ियाँ बनी हुई हैं जो मुझे अत्यंत डरावनी सी प्रतीत हुईं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने मोटी रस्सी बाँधी हुई है जिसके सहारे सीड़ियाँ चढ़ी जा सकती हैं। इन सीड़ियों को देख मैं सोच में पड़ गयी कि बिजली की अनुपस्थिति में इन खड़ी सीड़ियों पर चढ़ना कितना दुर्गम रहा होगा।

महात्मा गाँधी के अन्य निवास स्थान

अहमदाबाद का सत्याग्रह आश्रम
अहमदाबाद का साबरमती आश्रम
मुंबई का मणि भवन
पुणे का आगा खान महल

पोरबंदर का कस्तूरबा गृह

कीर्ति महल का एक गलियारा महल के पिछवाड़े स्थित पोरबंदर की गलियों तक पहुंचाता है। ऐसी ही एक गली के कोने में कस्तूरबा का पैतृक निवासस्थान है। मायके में वे कस्तूरबा कपाडिया कहलाती थीं। १९वी. सदी में बनी यह हवेली भी गाँधी निवास के सामान विशाल है। मैंने इस हवेली में घूमकर इसका निरिक्षण आरम्भ किया।

कस्तूरबा गाँधी का पैत्रिक निवास - पोरबंदर
कस्तूरबा गाँधी का पैत्रिक निवास – पोरबंदर

सर्वप्रथम हवेली के एक कक्ष में मुझे एक छोटा सा कार्यालय दिखाई दिया। भीतर मुझे कई रसोईघर भी दिखे जिसने मुझे असमंजस में डाल दिया था। इतने सारे रसोईघर क्यों? वहां उपस्थित एक अधिकारी ने मुझे बताया कि कस्तूरबा के इस निवासस्थान में कई भाईयों का हिस्सा था। कदाचित भाईयों के परिवार साथ रहकर भी अपनी स्वायत्तता बनाए हुए थे। व्यवहारिक सोच!

पोरबंदर के इस कस्तूरबा निवास में सर्व तलों को जोड़ती लकड़ी की सीड़ियाँ भी गाँधी निवास के ही सामान तीव्र ढलान वाली हैं। कस्तूरबा निवास में जिसने मुझे विशेषतः प्रभावित किया वह है यहाँ की शीत प्रणाली। दीवारों के भीतर कई जल नलिकाएं गड़ी हुई हैं जिनके द्वारा बहता जल कक्ष को शीतलता प्रदान करता है।

दोनों निवास स्थानों के मध्य खड़े मैं सोचने लगी कि क्या कभी मोहनदास व कस्तूरबा अपने बालपन में इन्ही गलियों में खेलते रहे होंगे!

कीर्ति मंदिर

कीर्ति मंदिर - पोरबंदर
कीर्ति मंदिर – पोरबंदर

कीर्ति मंदिर महात्मा गाँधी तथा कस्तूरबा गाँधी की स्मृति में बनाया गया एक स्मारक है। इस स्मारक में गांधीजी का निवास स्थान भी सम्मिलित है। कीर्ति मंदिर के विषय में एक रोचक जानकारी मेरे ध्यान में आई कि इसका निर्माण १९४७ में आरम्भ हो चुका था। अर्थात् गांधीजी को इस निर्माण कार्य के विषय में जानकारी थी। कहा जाता है कि उन्होंने स्वयं अपने घर का लेखापत्र कीर्ति मंदिर निर्मिती संस्था को सौंपा था। दुर्भाग्य से वे कीर्ति मंदिर को सम्पूर्ण होते नहीं देख पाए।

पोरबंदर के ही एक निवासी, सेठ नानजीभाई कालीदास मेहता ने गांधीजी का यह स्मारक बनवाया था। इमारत के साथ साथ उस भूमि का खर्च भी उन्होंने ही उठाया था। यह वही सेठ नानजीभाई कालीदास मेहता हैं जिनके प्रसिद्ध पुत्र जय मेहता को तो आप सब जानते ही हैं। जी हाँ! जय मेहता जो एक उद्योगपति होने के साथ साथ आईपीएल के कोलकाता दल के सह-स्वामी भी हैं।

गाँधी एवं कस्तूरबा के चित्र - कीर्ति मंदिर पोरबंदर
गाँधी एवं कस्तूरबा के चित्र – कीर्ति मंदिर पोरबंदर

कीर्ति मंदिर के बीचोंबीच महात्मा गांधी तथा कस्तूरबा गांधी की आदमकद प्रतिमाएं हैं। एक ओर स्मारिका विक्री दुकान तथा एक छोटी चित्र दीर्घा दिखाई दिए। किन्तु स्मारिका दुकान में खरीदने लायक कुछ विशेष प्राप्त नहीं हो सका। काश यहाँ गांधीजी तथा उनके विरासत सम्बन्धी कुछ विशेष वस्तुएं यहाँ उपलब्ध हो सकते। कैसी विडम्बना है कि कुछ घंटो पूर्व मैं मुंबई विमानतल पर स्थित एक विशिष्ट दुकान में थी जो गांधीजी से सम्बंधित स्मारिकाओं से भरी हुई थी। रही बात चित्र दीर्घा की तो यहाँ गाँधी परिवार के कई चित्र प्रदर्शित थे। गाँधी परिवार के वंश वृक्ष का भी रेखाचित्र अंकित था।

कीर्ति मंदिर के प्रथम तल पर मुझे गांधीजी की जीवनी को सुन्दर दर्शन प्रदान कराती विस्तृत चित्र दीर्घा देखने को मिली। कहीं उच्च कोटि के वस्त्र धारण किये बाल मोहनदास तो कहीं अंग्रेजो की तरह वस्त्र धारण किये अफ्रीका में वकालत करते गांधीजी। और कहीं धोती पहने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेते राष्ट्रपिता गांधीजी। अर्थात् इस चित्र दीर्घा में गांधीजी की १९वीं. शताब्दी के अंत से २०वीं. शताब्दी के आरम्भ तक की जीवनी का सजीव चित्रण देखने मिला।

सुदामापुरी अर्थात् सुदामा मंदिर

कृष्ण सुदामा की कथा तो आप सबने सुनी ही होगी। किन्तु क्या आप जानते हैं कि सुदामा पोरबंदर के निवासी थे? इस कथा में सुदामा कृष्ण से भेंट करने पोरबंदर से बेट द्वारका पहुंचे थे। वास्तव में कृष्ण तथा सुदामा बाल मित्र थे। उज्जैन के संदीपनी आश्रम में उन दोनों ने साथ अध्ययन किया था।

सुदामा मंदिर - पोरबंदर
सुदामा मंदिर – पोरबंदर

सुदामा कृष्ण की इसी मैत्री को दर्शाते इस मंदिर में उनके कई भित्ति चित्र थे। एक चित्र में कृष्ण सुदामा के चरण धो रहे हैं तथा रुक्मिणी उन्हें पंखा झल रही हैं। वहीं कुछ चित्रों में कृष्ण तथा रुक्मिणी दोनों को सुदामा के चरण धोते दर्शाया गया था।

मंदिर के समक्ष धरती पर एक भूलभुलैया बनी हुई थी जिसे सुदामा का लख-चौरासी कहा जाता है। कहा जाता है कि मरणोपरांत मनुष्य योनी में फिर जन्म लेने से पूर्व एक आत्मा को ८४ लाख अन्य योनियों में जन्म प्राप्त होता है। भक्तों का मानना है कि इस भूलभुलैया के भीतर चलने से इस पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति प्राप्त होती है।

सुदामा मंदिर की दीवारों पर सुदामा कृष्ण के मिलन का चित्रण
सुदामा मंदिर की दीवारों पर सुदामा कृष्ण के मिलन का चित्रण

यहाँ का मुख्य मंदिर मुझे अत्यंत आकर्षक प्रतीत हुआ। मंदिर के अग्रभाग में स्तंभों युक्त एक प्रांगण था। कहा जाता है कि १२वीं. सदी में निर्मित यह मंदिर लगभग १००० वर्ष प्राचीन है। आप मंदिर के भीतर द्वारकाधीश एवं सुदामा दोनों की प्रतिमाएं देखेंगे तथा बाहर सुदामा कुंड नामक एक कुआं। मुख्य मंदिर के पृष्ठभाग में हरसिद्धि देवी समेत कई अन्य देवी-देवताओं को समर्पित छोटे छोटे मंदिर भी देख सकते हैं। मंदिर के चारों ओर सुन्दर बगीचे बनाए हुए हैं जिसमें कृष्ण सुदामा की कथा को दर्शाती कई मूर्तियाँ बनी हुई थीं।

पोरबंदर के बाज़ार
पोरबंदर के बाज़ार

पोरबंदर की गलियों तथा सडकों पर गाड़ी से घूमते समय मुझे अंग्रेजी उपनिवेशीय काल की कई अलंकृत हवेलियाँ दिखाई दीं। आकर्षक झरोखों तथा द्वारों से सज्ज ये हवेलियाँ मन मोह रही थीं।

Porbandar - Birthplace of Gandhi & Sudama पोरबंदर स्थित तारा मंडल भारत के प्राचीन तारा मंडलों में से एक तथा यहाँ के मुख्य आकर्षणों में से एक है। अपने पोरबंदर यात्रा के समय इसका भी अवश्य आनंद उठायें।

पोरबंदर सड़क मार्ग, रेल तथा विमान सेवा द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। मैं जब यहाँ विमान द्वारा पहुंची, विमानतल पर, सड़क किनारे उपस्थित ढाबों के सामान दिखाते एक अनोखे जलपानगृह ने मुझे आकर्षित किया। काश चाय की कीमत भी ढाबों की तरह ही होती!

अनुवाद: मधुमिता ताम्हणे

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सत्याग्रह आश्रम, कोचरब, अहमदाबाद – जहाँ गाँधी जी महात्मा बने https://inditales.com/hindi/satyagrah-ashram-kochrab-ahmedabad/ https://inditales.com/hindi/satyagrah-ashram-kochrab-ahmedabad/#respond Sun, 30 Apr 2017 02:30:57 +0000 https://inditales.com/hindi/?p=331

यूँ तो हम सभी जानते हैं कि महात्मा गाँधी का जन्म पोरबंदर में हुआ था। लेकिन कोचरब – अहमदाबाद में एक महात्मा का जन्म उस समय हुआ जब वो अफ्रीका से सन् १९१५ में वापस आये और यहाँ आकर उन्होंने एक आश्रम की स्थापना करी। बैरिस्टर जीवनलाल देसाई ने अहमदाबाद के कोचरब नामक स्थान में […]

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गुजरात विद्यापीठ – पुस्तक भंडार
गुजरात विद्यापीठ – पुस्तक भंडार

यूँ तो हम सभी जानते हैं कि महात्मा गाँधी का जन्म पोरबंदर में हुआ था। लेकिन कोचरब – अहमदाबाद में एक महात्मा का जन्म उस समय हुआ जब वो अफ्रीका से सन् १९१५ में वापस आये और यहाँ आकर उन्होंने एक आश्रम की स्थापना करी। बैरिस्टर जीवनलाल देसाई ने अहमदाबाद के कोचरब नामक स्थान में एक सुंदर सा बंगला गांधीजी को उपहार स्वरूप दिया था जो अब सत्याग्रह आश्रम के नाम से जाना जाता है।

सत्याग्रह आश्रम – कोचरब, अहमदाबाद में गाँधी जी का प्रथम निवास

साबरमती के किनारे जब साबरमती आश्रम की स्थापना हो रही थी, तब गांधीजी अपनी पत्नी कस्तूरबा गाँधी के साथ दो साल तक इस दो मंजिले बंगले में १९९७ तक रहे। एक सूक्ष्म से सर्वेक्षण से मुझे ज्ञात हुआ कि कई कारणों से गाँधीजी ने अहमदाबाद का चुनाव अपने पहले आश्रम के रूप में किया था। जैसे यहाँ पर वो अपनी मात्रभाषा गुजराती का प्रयोग कर सकते थे। अहमदाबाद हथकरघा उद्योग का मुख्य स्थान था इसलिए उनके चरखा आन्दोलन को एक अच्छी शरुआत मिल सकती थी और तीसरा, यह शहर धनवान उद्योगपतियों का शहर था जिनसे वो भारत की आज़ादी में चंदे की आशा रख सकते थे। १९९७ में, प्लेग की महामारी ने उन्हें कोचरब से बाहर जाने के लिये मजबूर कर दिया।

सत्याग्रह आश्रम - कोचरब, अहमदाबाद
सत्याग्रह आश्रम – कोचरब, अहमदाबाद

साबरमती आश्रम को ही हम गाँधी आश्रम के नाम से जानते हैं। लेकिन यह एक खोज थी की पहला गाँधी आश्रम अहमदाबाद के कोचरब इलाके में था। मेरे दोस्त तुषार मुझे इस सत्याग्रह आश्रम में ले गए। वो जबकि इस शहर को बहुत अच्छी तरह जानते थे पर फिर भी उस आश्रम तक पहुँचने के लिये हमें थोडा परिश्रम करना पड़ा। कुछ दूर से देखने पर वह पीले रंग का बंगला ब्रिटिश काल का लग रहा था। किनारे पर एक दुकान थी जहाँ पर हाथ से बने कपड़े और ग्रामोधोग का सामान बिक रहा था। जिस प्रकार साबरमती आश्रम को देखने के लिये दर्शको की भीड़ लगी रहती है यहाँ ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला।

पूजा स्थल

सत्याग्रह आश्रम – कोचरब, अहमदाबाद
सत्याग्रह आश्रम – कोचरब, अहमदाबाद

जब हमने आश्रम में प्रवेश किया तो हमें वहां कोई भी व्यक्ति नही दिखा। आश्रम के दाएँ तरफ एक बहुत बड़ा मैदान था जिसके एक तरफ एक बड़ा सा चबूतरा था। एक बोर्ड के माध्यम से हमें जानकरी प्राप्त हुई कि यह मैदान गाँधी जी पूजा के लिये प्रयोग किया करते थे। आश्रम की बाएँ तरफ बंगला था और उस बंगले के पीछे कतार में कुछ कमरे थे। हमने उन व्यवस्थित कमरों के दरवाज़ों को बहुत हिचकिचाते हुए खोला जहाँ पर महात्मा गाँधी अपनी पत्नी के साथ रहते थे। वहाँ की दीवारों पर महत्मा गाँधी द्वारा रचित पुस्तक हिन्द स्वराज से लिये हुए उनके विचरों को लिखा गया था। वहाँ पर उन सभी महान व्यक्तियों की तस्वीरें थी जो महात्मा गाँधी से प्रभावित थे जैसे टैगोर इत्यादि। प्रदेश के सभी आश्रमों की तस्वीरें भी उनके परिचय के साथ वहाँ अंकित थीं। दीवारों पर और वहाँ की सभी अलमारियों के शीशों पर महात्मा गाँधी और उनकी पत्नी की तस्वीरें अंकित थीं। वहाँ एक चौखट पर गांधीजी को चंचल हास्य चित्रों द्वारा भी दर्शाया गया था।

गांधीजी का कमरा

गाँधी जी का कमरा – सत्याग्रह आश्रम, कोचरब, अहमदाबाद
गाँधी जी का कमरा – सत्याग्रह आश्रम, कोचरब, अहमदाबाद

गांधीजी के कमरे में उनकी पसंदीदा मेज़ थी जिसपर वो लिखने पढने का काम करते होंगे।सफेद गद्दे फर्श पर बिछे हुए थे और उस कमरे में एक तरफ़ लकड़ी से बना हुआ गांधीजी का प्रिय साधारण सा चरखा रखा हुआ था। हर तरह से यहाँ के कमरे साबरमती आश्रम के कमरों के समान ही लग रहे थे। कमरों को देखकर हम लोग बाहर आये तो वहाँ हमारी मुलाकात उन व्यक्ति से हुई जो इस बंगले की देखभाल करते हैं। वह हमें बंगले के पीछे बने उन कमरों की तरफ ले गए जो रसोई घर की तरह लग रहे थे। हमारा आधुनिक दिमाग इस बात को मानने को राज़ी नही था कि इतने बड़े बंगले में कोई भी शौचालय न हो – यह कैसे हो सकता है। लेकिन तुरंत ही ध्यान आया कि आज से सौ साल पूर्व शौचालय घर के अंदर नहीं होते थे। सामने वाले गलियारे में एक सज्जन पुरुष अख़बार पढ़ रहे थे। उन्होंने हमें पहली मंजिल पर बने पुस्तकालय के बारे में अवगत कराया।

पुस्तकालय

गाँधी जी की तस्वीरें – सत्याग्रह आश्रम
गाँधी जी की तस्वीरें – सत्याग्रह आश्रम

अब मैं जल्दी से जल्दी पुस्तकालय में पहुँचना चाहती थी लेकिन अफ़सोस एक अधेड़ व्यक्ति – जिनके पास पुस्त्कालय की चाबी थी, इनकार कर दिया। मैंने उनसे आग्रह किया लेकिन उन्होंने कहा कि यह पुस्तकालय सिर्फ़ यहाँ के लोगों के लिये ही है। मैंने उनसे एक बार फिर से आग्रह किया कि वो मुझे केवल पुस्तकालय को देखने की मंजूरी दे दें लेकिन उनका उत्तर था कि विश्वविद्यालय जाओ और वहाँ किताबों को देखो। मैं उन्हें कैसे बताऊँ कि पुस्तकालय का मेरे जीवन में कितना बड़ा महात्व है। मैंने और तुषार नें उनको मनाने का हर संभव प्रयास किया परन्तु उनका वही उत्तर था कि पुस्तकालय केवल यहाँ के लोगों के लिये ही है। मैं सोच रही थी कि गांधीजी का क्या कभी यह उद्देश्य रहा होगा कि कोई भी उनके पुस्तकालय को नहीं देख सकता सिर्फ़ कुछ लोगों के जो अपने आपको गांधीजी का अनुयायी मानते हैं।

गुजरात विद्यापीठ विश्वविद्यालय

गुजरात विद्यापीठ विश्वविद्यालय जो कोचरब आश्रम के समीप ही है – इस आश्रम देख रेख करता है। गांधीजी नें ही इस विद्यापीठ की स्थापना १९२० में की थी। मैं गांधीजी से सम्बंधित कुछ पुस्तकें लेने वहाँ गयी। मुख्य रूप से उस पुस्तक का संस्करण जो हाथ से बने कागज़ पर गांधीजी द्वारा गुजरती में लिखी पुस्तक हिन्द स्वराज जिसका बाद में हिंदी और अंग्रेजी में अनुवाद हुआ था। यह एक बहुत ही अच्छा पुस्तक भंडार था जहाँ पर आज़ादी के आन्दोलनों से जुड़ी हुई बहुत सी पुस्तकें थीं।

पर्यटन विभाग

सत्याग्रह आश्रम का प्रांगन
सत्याग्रह आश्रम का प्रांगन

कुछ समाचारपत्रों से मुझे ज्ञात हुआ कि गुजरात पर्यटन विभाग इस कोचरब स्थित सत्याग्रह आश्रम को लोगों के रहने की जगह में परिवर्तित कर रहा है। जहाँ पर पर्यटक आकर गांधीजी के समय में बनाएं हुए नियमों का पालन करते हुए रह सकते हैं। मैं पूर्णरूप से विश्वस्त नहीं हूँ कि इस विरासत को एक पर्यटन संपत्ति बनाना चाहिए या नहीं। लेकिन इस विचार पर एक बार फिर से विचार करना चाहिए शायद इसलिए कि यह सम्पति आश्रम का प्रतिरूप है।

मेरे विचार से आश्रम को आश्रम ही रहने दिया जाए क्योंकि यह हमारे इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है लेकिन हाँ पुस्तकालय में जाने की अनुमति सभी को होनी चाहिए।

हिंदी अनुवाद – शालिनी गुप्ता

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