जंगल यात्रा Archives - Inditales श्रेष्ठ यात्रा ब्लॉग Mon, 26 Jun 2023 17:22:31 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.5 सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान के वन का आनंद उठाने के ५ प्रकार https://inditales.com/hindi/satpura-rashtriya-udyaan-safaari-madhya-pradesh/ https://inditales.com/hindi/satpura-rashtriya-udyaan-safaari-madhya-pradesh/#respond Wed, 23 Nov 2022 02:30:25 +0000 https://inditales.com/hindi/?p=2872

सतपुड़ा के वनों के विषय में कवि भवानी प्रसाद ने सुन्दर उद्गार व्यक्त किये हैं, घने किन्तु उनिंदे। मैं उनसे पूर्णतः सहमत हूँ। लताओं व मकड़ियों से भरे वन वास्तव में उनिंदे हैं। एक समय बाघों से भरे इन वनों में अब उतने बाघ नहीं हैं जितने कदाचित कवि भवानी प्रसाद ने देखे होंगे। इस […]

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सतपुड़ा के वनों के विषय में कवि भवानी प्रसाद ने सुन्दर उद्गार व्यक्त किये हैं, घने किन्तु उनिंदे। मैं उनसे पूर्णतः सहमत हूँ। लताओं व मकड़ियों से भरे वन वास्तव में उनिंदे हैं। एक समय बाघों से भरे इन वनों में अब उतने बाघ नहीं हैं जितने कदाचित कवि भवानी प्रसाद ने देखे होंगे।

सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान के उनींदे जंगल
सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान के उनींदे जंगल

इस मास के आरम्भ में हमें पगडण्डी सफारी से आमंत्रण मिला था कि हम देन्वा नदी के तट पर स्थित उनके मनमोहक देन्वा बैकवाटर एस्केप रिसोर्ट (Denwa Backwater Escape resort) में ठहरे व उसका आनंद उठायें। रिसोर्ट के समक्ष ही सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान स्थित है। तीन दिवसों तक हम रिसोर्ट एवं राष्ट्रीय उद्यान में पूर्णतः मग्न रहे। देन्वा के अप्रवाही जल को पार कर राष्ट्रीय उद्यान का विभिन्न किन्तु रोचक रीति से अवलोकन करना अत्यंत रोमांचक अनुभव था। इस राष्ट्रीय उद्यान में हमने भिन्न भिन्न सफरियों का कैसे आनंद उठाया, उसका विस्तृत विवरण एवं अनुभव मैं आपके साथ बांटना चाहती हूँ।

सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान के वनों का आनंद उठाने के ५ प्रकार

जीप सफारी

यह राष्ट्रीय उद्यानों के अवलोकन का सर्वसामान्य मार्ग है। लगभग सभी राष्ट्रीय उद्यानों में जीप सफारी की सुविधा होती है। वन विभाग का वनरक्षक आपको जीप में बिठाकर पूर्व निर्धारित मार्गों द्वारा वन के आतंरिक भागों में ले जाता है ताकि हमें वन्य पशु-पक्षियों को उनके प्राकृतिक परिवेश में देखने का अवसर प्राप्त हो सके। हमने भी दो सफारियाँ की, एक प्रातः काल में जो लगभग ६:३० बजे आरम्भ होती है तथा दूसरी संध्या में जो लगभग संध्या ४ बजे आरम्भ होती है। ऋतुओं के अनुसार इन समयों में किंचित फेरबदल हो सकता है।

जंगल में खेलते हिरण
जंगल में खेलते हिरण

हमारे रिसोर्ट के कुछ रहवासियों को एक सफारी में एक तेंदुआ एवं एक रीछ दृष्टिगोचर हुए थे। इस समाचार ने हमारी आशाओं में पर्याप्त वृद्धि कर दी तथा हम भी इन वन्य पशुओं के दर्शन करने के लिए आतुर हो उठे। सफारी के समय हमने हिरणों व बंदरों की हांक सुनी जो यह दर्शाती है कि कोई मांसाहारी वन्य पशु निकट ही है। किन्तु बाघ, रीछ अथवा तेंदुए जैसे विशाल वन्य पशुओं को देख पाने के लिए भाग्य एवं सही समय की आवश्यकता होती है।

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हमारा सौभाग्य नहीं था कि हम उस सफारी में बाघ, रीछ अथवा तेंदुए देख पाते। किन्तु हमने बड़ी संख्या में भारतीय गौर अथवा जंगली भैंसे तथा सांभर हिरण देखे जो विभिन्न क्रियाकलापों में व्यस्त थे। हमने लंगूर, बन्दर तथा चित्तीदार हिरणों के अनेक झुण्ड देखे। वन में अनेक पक्षी भी देखे। वास्तव में ये पक्षी ही थे जिनके कारण हम पुनः पुनः वन में जाने के लिए इच्छुक हो रहे थे।

सतपुड़ा की विशालकाय मकड़ियाँ
सतपुड़ा की विशालकाय मकड़ियाँ

सतपुड़ा के वनों में हमारी सर्वोत्तम खोज थी, विशालकाय मकड़ियाँ। उनके जाले इतने विस्तृत थे कि उनके द्वारा ऊँचे ऊँचे वृक्ष आपस में जुड़कर एक हो रहे थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वे विशालकाय मकड़ियाँ वृक्षों के ऊपर एक छत बुन रही हों। रात्रि के अन्धकार में अन्य वृक्ष लुप्त हो जाते थे किन्तु भूतिया वृक्ष अथवा कटीरा अपने उजले तने के कारण चन्द्रमा के प्रकाश में भूत के समान चमकता रहता था।

पदयात्रा सफारी

वन के मूल क्षेत्र की सीमा पर पगडंडियाँ बनाई गयी हैं जहां पदयात्रा करने की अनुमति होती है। टिकट क्रय करने के पश्चात वन संरक्षक आपको एक परिदर्शक प्रदान करता है जो आपको उन पगडंडियों के द्वारा वन का भ्रमण करवाता है। वन में वृक्षों के मध्य पक्षियों, पशुओं, मकड़ियों एवं तितलियों को ढूँढने में आपकी सहायता करता है। वन एवं आसपास के क्षेत्रों में उगने वाले वृक्षों एवं अन्य पौधों की जानकारी भी देता है। किन वृक्षों व पौधों के समीप जाना जोखिम भरा हो सकता है तथा किन के समीप जाना सुरक्षित है, इसकी भी जानकारी देता है। वन के कुछ पौधे अथवा झाड़ियाँ काँटों से भरी होती हैं, कुछ हमारे वस्त्रों में अटक जाती है अथवा खाज उत्पन्न कर सकती हैं, इत्यादि जानकारी हमारा परिदर्शक भी हमें निरंतर दे रहा था। हमारे सचेत परिदर्शक ने हमें झाड़ियों में छुपी सरीसर्प जैसी कई प्रजातियाँ दिखाई।

सतपुड़ा की पहाड़ियों पर सूर्योदय
सतपुड़ा की पहाड़ियों पर सूर्योदय

१४ वर्ष से कम आयु के बालक-बालिकाओं को इस सफारी की अनुमति नहीं होती है। इस सफारी के लिए ऐसे वस्त्र एवं जूते धारण करें जो आपके अधिकतम अंगों को पूर्णतः ढँक सकें, सुखद हों तथा वन के सामान्य परिवेश से साम्य रखते रंगों के हों। इससे आप स्वयं को सुरक्षित रख पायेंगे तथा वन्य पशु-पक्षियों को आशंकित भी नहीं करेंगे।

सतपुड़ा के अप्रवाही जल में नौका सफारी

यह सफारी लगभग एक घंटे की है जो देन्वा नदी के अप्रवाही जल पर नौका द्वारा की जाती है। नदी में अनेक लघु द्वीप हैं जो पक्षियों के लिए सर्वोत्तम वास हैं। इस सफारी में हरेभरे घने वन आपको चारों ओर से घेर लेते हैं। यहाँ का सर्वोत्तम आकर्षण है, उड़ते हुए पक्षियों को देखना। उन्हें देख आपकी आँखे स्तब्ध रह जायेंगी। पक्षी कभी एकल, कभी जोड़े में तो कभी झुण्ड में उड़ते हुए आपका मन मोह लेंगे।

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दोपहर की सफारी का एक अन्य आकर्षण है जल में डूबते हुए सूरज को देखना। यह दृश्य प्रतिदिन एवं प्रतिक्षण परिवर्तित होता रहता है। जिस दिन हम यहाँ आये थे, सूर्य जल को केसरिया एवं नीले रंगों की सम्मिश्रित छटा प्रदान कर रहा था। उस दृश्य को शब्दों में सीमित करना अन्याय होगा। उसका आनंद उठाने के लिए आपको यहाँ प्रत्यक्ष आना होगा ताकि आप स्वयं प्रकृति के विभिन्न आयामों का अद्भुत आनंद उठा सकें तथा उन रंगों की अठखेलियों से एकाकार हो सकें।

रात्रिकालीन जीप सफारी

यह अत्यंत रोमांचक सफारी है। रात्रि के अन्धकार में खुली जीप में वनों में घूमना, भयावह प्रतीत होता है। वर्षों के अनुभव से सफारी के परिदर्शक को पशु-पक्षियों की उपस्थिति का आभास हो जाता है। तब वह तेज बत्ती अथवा टॉर्च का प्रयोग कर उसके प्रकाश में हमें वन्य पशु दिखाता है। यह सफारी नदी के तट पर की जाती है। सामान्यतः यह सफारी रिसोर्ट द्वारा ही आयोजित की जाती है। प्रकृति तज्ञ परिदर्शक भी रिसोर्ट ही प्रदान करता है जो रात्रि में पशुओं को देख पाने में हमारी सहायता करता है, विशेषतः निशाचर पशु।

रात्रि की जीप सफारी
रात्रि की जीप सफारी

हमारे परिदर्शक अथवा सफारी गाइड ने हमें चमकती आँखों को ढूँढते रहने का महत्वपूर्ण परामर्श दिया। रात्रि में पशुओं को ढूँढने का यह एक कारगर व एकमात्र उपाय है। इसका अर्थ है कि उस समय आप उन पशुओं के समीप भी हों तथा वे आपकी ओर देख भी रहें हों। इसके लिए अच्छे भाग्य की अत्यंत आवश्यकता होती है। आरम्भ में हमने केवल कुछ भारतीय खरगोश यहाँ-वहां कूदते-फांदते देखे। वे मानो हमारे लिए सौभाग्य का पिटारा ही ले आये।

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इसके पश्चात, सर्वप्रथम हमने दो भारतीय रीछ देखे, उनमें से एक ने हमारी जीप के समक्ष ही सड़क पार की। उसे देख तो मानो हमारी सफारी सफल हो गयी। इसके पश्चात हमने कुछ निशाचर पक्षी भी देखे। उनमें इंडियन नाईट जार अथवा चपका पक्षी को देखना हमारे लिए विशेष था।

पक्षी दर्शन पगडंडी

पक्षियों के दर्शन का सर्वोत्तम उपाय है, पैदल चलना। उस पर, यदि आप विशाल समूह में ना हो तो अति उत्तम। हमने अपने रिसोर्ट के चारों ओर स्थित जलभूमि के चारों ओर पैदल भ्रमण किया। हमने जलाशय के आसपास अनेक पक्षी देखे, जैसे कठफोड़वा, नीलकंठ, तुइया तोता एवं कुछ रंगबिरंगी बतखें। पक्षी दर्शन का सर्वोत्तम समय सूर्योदय एवं सूर्यास्त होता है। पक्षी दर्शन के समय मेरे पतिदेव तो पक्षियों के छायाचित्रीकरण में जुट गए।

सूखे पेड़ों पर पक्षी
सूखे पेड़ों पर पक्षी

वहीं मैंने पक्षियों के साथ इस क्षेत्र में उगते अनेक औषधिक पौधों को भी देखा। इन वनों में तेंदू पत्तों के अनेक वृक्ष हैं जिनका प्रयोग बीड़ी बनाने में होता है। यह इन वनों से प्राप्त राजस्व का प्रमुख स्त्रोत है। यहाँ उपलब्ध घिरिया के वृक्षों के भी अनेक उपयोग हैं। इसके पत्तों का प्रयोग मच्छरों को भगाने के लिए तथा रोगाणुरोधक के रूप में किया जाता है। इसकी लकड़ी से हल के हत्थे बनाये जाते हैं क्योंकि यह हल्के होने के पश्चात भी इनमें अपार शक्ति व दृढ़ता होती है।

रिमझा वृक्ष की लकड़ी से बैलगाड़ी के चक्के बनाए जाते हैं क्योंकि यह शीघ्र झिरता नहीं है। जंगली तुलसी का प्रयोग यहाँ के लोग औषधि निर्माण में किया जाता है।

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इन सफारियों के अतिरिक्त, हाथी पर सवार होकर सफारी करने का विकल्प भी उपलब्ध है। इस सफारी की विशेषता यह है कि आप ऊँचाई से वन्य परिवेश का अवलोकन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त ग्रामीण परिवेश के अवलोकन के लिए ग्राम-सफारी भी होती है। यह विशेष रूप से विदेशी पर्यटकों के लिए अत्यंत रोचक हो सकती है एवं हमारे ग्रामीण परिवेश से परिचित होने में उनकी सहायक हो सकती है।

हमने जिन वनस्पतियों, वृक्षों व पौधों, पशु-पक्षियों एवं अन्य जीवों को यहाँ देखा उनके अन्य चित्र हम शीघ्र ही आपसे साझा करेंगे।

अनुवाद: मधुमिता ताम्हणे

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भारत में जंगल सफारी – कब, कहाँ, क्या और कैसे देखें? https://inditales.com/hindi/jangal-safari-rashtriya-udyan-bharat/ https://inditales.com/hindi/jangal-safari-rashtriya-udyan-bharat/#comments Wed, 05 Jun 2019 02:30:40 +0000 https://inditales.com/hindi/?p=1359

क्या हमें भारत में जंगल सफारी करनी चाहिए? जी हाँ! भारत अब भी जैव विविधता का धनी है। इसका अनुभव प्राप्त करने के लिए जंगल सफारी से उत्तम अन्य कोई साधन नहीं है। प्रकृति से हस्तक्षेप किये बिना भारत की जैव धरोहर का आनंद उठाना है तो अवश्य जंगल सफारी कीजिये। छुट्टियों में जंगल सफारी […]

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क्या हमें भारत में जंगल सफारी करनी चाहिए? जी हाँ! भारत अब भी जैव विविधता का धनी है। इसका अनुभव प्राप्त करने के लिए जंगल सफारी से उत्तम अन्य कोई साधन नहीं है। प्रकृति से हस्तक्षेप किये बिना भारत की जैव धरोहर का आनंद उठाना है तो अवश्य जंगल सफारी कीजिये।

छुट्टियों में जंगल सफारी क्यों जाएँ?

वर्तमान में हमारा जीवन नगरीय भीड़भाड़ एवं सीमेंट कंक्रीट के जंगले में उलझ कर रह गया है। हम इस भौतिकवादी विश्व के दलदल में धंसते जा रहे हैं। इसी कारण बीच बीच में जंगल में भ्रमण करना अति आवश्यक हो जाता है।

जंगल सफारी भारत के राष्ट्रीय उद्यानों में जंगल के भीतर एक भिन्न विश्व बसता है। यहाँ इसके अपने नियम एवं जीवन शैली होती है। जंगलों एवं राष्ट्रीय अभयारण्यों की हरियाली एवं वहां के जीव-जंतुओं के बीच कुछ समय बिताना एक अविस्मरणीय अनुभव है। यह हमारे जीवन की भागदौड़ में शान्ति एवं ठहराव देता है। इसीलिए आप अपनी आगामी छुट्टी में जंगल अथवा अभयारण्य के भ्रमण का कार्यक्रम अवश्य बनाएं।

जंगल सफारी छुट्टियों में कौन कौन से अनुभव लेना चाहिए?

जंगल सफारी आपको जंगल के सम्पूर्ण पारितंत्र का अनुभव प्रदान करता है। हम में से कई पर्यटक जंगल जाकर केवल बड़े जंगली जानवरों को खोजते हैं। स्मरण रखिये कि सिंह, बाघ, तेंदुआ, भालू, जंगली कुत्ते इत्यादि जंगल में अकेले नहीं रहते। उनके साथ सम्पूर्ण पारितंत्र होता है।

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में जीप सफारी
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में जीप सफारी

बाघ वहीं होगा जहां उसका भोजन होगा। अर्थात जंगल में आपको हिरणों के झुण्ड दिखाई पड़ेंगे। रूककर इस मनभावन पशु की सुन्दरता निहारिये। इसकी वह मनमोहक चाल देखिये जिस पर सदियों से कवियों ने कई प्रसिद्ध कवितायें रची हैं। इनके साथ साथ आप जंगली हाथी, नीलगाय, गौर, सियार, जंगली कुत्ते इत्यादि कई जानवरों को देख सकते हैं।

नदी-तालाब के आसपास आपको मगरमच्छ अथवा घड़ियाल भी दृष्टिगोचर हो सकते हैं। यह इस तथ्य पर निर्भर है कि आप किस क्षेत्र के जंगल में विचरण कर रहे हैं।

शाकाहारी पशु

हाथी, हिरण, गेंडे, सांबर, गौर इत्यादि मेरे सामान शाकाहारी हैं। स्मरण रहे, इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि वे किसी पर हमला नहीं कर सकते। यदि उन्हें अपने प्राणों पर आघात का आभास होने लगे तो वे अवश्य हमला कर सकते हैं।

पक्षी

घने जंगलों में पक्षियों को ढूंढ पाना आसान नहीं! वहां उन्हें छुपने के लिए भरपूर स्थान प्राप्त होते हैं। वे हमसे लुका-छुपी का खेल खेलते रहते हैं। उन्हें ढूँढने का एक आसान उपाय आपको बताना चाहती हूँ। वे जब उड़ें तब उनके पीछे दृष्टि दौड़ाएं तथा उनके बैठने की प्रतीक्षा करें। कुछ पक्षियों को उनके विशिष्ट रंगों द्वारा पहचाना जा सकता है। नीलकंठ को उड़ते देखना अथवा नवरंग पक्षी के नौ रंगों को निहारना सदैव ही एक मनमोहक दृश्य होता है।

भरतपुर पक्षी उद्यान में चील
भरतपुर पक्षी उद्यान में चील

जंगलों के बाहरी सीमा पर यदि आप पगभ्रमण करें तो पक्षियों की विभिन्न प्रजातियाँ देख आप विस्मित हो जायेंगे। उनके रंगों एवं चहचहाहट को ध्यानपूर्वक सुनने की चेष्टा करें। ये आपको उन्हें पहचानने में सहायता करेंगी। कदाचित वहां आपको कई ऐसे पक्षी दिखेंगे जिन्हें इससे पूर्व ना तो आपने कभी देखा होगा ना ही इन्हें जानते होंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार भारत में पक्षियों की लगभग १३०० प्रजातियाँ पायी जाती हैं।

तितलियाँ

सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान में एक तितली
सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान में एक तितली

रंगबिरंगी तितलियाँ! छोटी बड़ी तितलियाँ! सूर्य के प्रकाश में फडफडाते ये नन्हे कीट सहज ही आपका मन मोह लेंते हैं। जंगलों में तो ये बहुतायत में उपलब्ध होते हैं। भारत में तितलियों की १००० से भी अधिक प्रजातियाँ पायी जाती हैं।

पतंगे

भारत के जंगलों में आप अनगिनत पतंगे देख सकते हैं। त्रिभुज के आकार के इस पतंगे को देखिये जिसे हमने सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान में किये गए जंगल सफारी के समय ढूंढा था। है ना यह अनोखा?

त्रिभुज पतंगा
त्रिभुज पतंगा

एशिया से लेकर दक्षिण प्रशांत के ऊष्णकटिबंधीय तथा उप-ऊष्णकटिबंधीय स्थानों में पाया जाने वाला यह त्रिभुज पतंगा (Trigonodes hyppasia)एक कीट है। इसके दोनों पंखों के अग्रभाग पर श्वेत किनारी के काले त्रिभुज बने होते हैं। प्रत्येक त्रिभुज के भीतर दो और त्रिभुज होते हैं।

ये जब पंख समेट कर बैठते हैं तब एक बड़ा श्वेत किनारी का त्रिभुज बनाते हैं जिसके भीतर चार त्रिभुज बन जाते हैं। अर्थात् ये चाहे उड़ रहे हों या बैठे हों, आप इन्हें आसानी से पहचान सकते हैं। पंखों पर इस आकर्षक त्रिकोणीय आकृति के कारण इसे चौकोणीय पतंगा भी कहा जाता है। इसका आकर लगभग २ सेंटीमीटर तथा पंखों का फैलाव ४ सेंटीमीटर होता है।

वृक्ष एवं लताएँ

लियाना बिना पत्तों की लम्बी तने वाली बेल है। इसकी जड़ें मिटटी की सतह पर फैली होती हैं तथा इसे ऊंचा बढ़ने के लिए अन्य वृक्षों के आधार की आवश्यकता होती है। जंगल के अन्य वृक्षों के समान यह भी धूप, जल एवं पोषण के लिये उसी मिट्टी पर निर्भर रहता है।

लियाना बेल
लियाना बेल

जंगल सफारी के समय आप वहां के वृक्षों एवं पौधों की जैव विविधता का बारीकी से अवलोकन करें। नवीन अंकुरित पौधों से ले कर दशकों पुराने वृक्षों तक, सब जंगल के पारितंत्र (ecology) का भाग हैं। इनमें कुछ वृक्ष सदियों प्राचीन हैं। जंगल के कुछ भाग इतने घने होते हैं कि सूर्य का प्रकाश जंगल के भीतर, धरती तक नहीं पहुँच पाता। इन ऊंचे ऊंचे वृक्षों पर कई प्रकार की लतायें लिपटी हुई होती हैं।

सर्प

जंगल में सर्पों की कई प्रजातियाँ दृष्टिगोचर होती हैं जिनमें कुछ विषैले भी होते हैं। नाग से लेकर वाईपर जैसे विषैले सर्प एवं अजगर से लेकर हरी वाइन सर्प से धामिन सर्प तक के बिना विषयुक्त सर्प यहाँ सफारी में बहुधा दिखाई पड़ जाते हैं। इनमें अजगर में एक विशेषता होती हैं।

लंगूर के धर दबोचे हुए अजगर
लंगूर के धर दबोचे हुए अजगर

अजगर एक विशाल सर्प होने के बाद भी विषैला नहीं होता। वह अपने शिकार को जकड़ कर उसका श्वास अवरुद्ध कर देता है, तत्पश्चात उसे निगल लेता है। सलग्न छायाचित्र में आप देख सकते हैं किस प्रकार एक अजगर लंगूर बन्दर को जकड़ रहा है।

मकड़ी

छोटे, बड़े एवं विशाल मकड़ियां एवं उनके जाले आपको जंगल में हर ओर दिखाई देंगे। जंगलों की झाड़ियों एवं वृक्षों की शाखाओं को जाले में बुनते, भिन्न भिन्न प्रकार की मकड़ियों को देख आप विस्मित हो जायेंगे।

मकड़ी और उसके बुने जाल
मकड़ी और उसके बुने जाल

नेफिला पिलिपेस मकड़ी जंगलों में बहुतायत में पायी जाती हैं। मादा मकड़ी अपेक्षाकृत बड़ी होती है। ३० से ५० मिलीमीटर के धड़ के साथ इसका सम्पूर्ण आकार २० सेंटीमीटर तक हो सकता है। वहीँ नर मकड़ी का धड़ केवल ५ से ६ मिलीमीटर तक ही होता है। जाले बुनने वाली मकड़ियों में इस प्रजाति की मकड़ियां सर्वाधिक विशाल होती हैं। इसके सुनहरे लंबवत जाल पर अनियमित आकार की जालियां होती हैं जो असममित होती हैं। यह विश्व की सर्वाधिक विशाल मकड़ियों में से एक है।

अर्गिओपे एमुला अथवा अंडाकार सेंट एंड्रू क्रॉस मकड़ी ऊष्णकटिबंधीय घास के मैदानों में पाए जाने वाली विशिष्ट मकड़ी है। ये मकड़ियां जब जाला बुनती हैं तब उन पर टेढ़ी-मेढ़ी वक्र रेखाएं बनाती हैं। छद्मावरण की भूमिका निभाते इस जाले के कारण ही इस मकड़ी को क्रॉस मकड़ी कहा जाता है।

फनल मकड़ी अथवा कीप मकड़ी द्वारा बुने जाल भी आकर्षक होते हैं। आप सोच में पड़ जाते हैं कि क्या इन्ही से ही कीप नाली की आकृति का आरम्भ हुआ था?

कीट

जंगल सफारी के समय, विशेषकर झीलों एवं जलनिकायों के समीप, आप विभिन्न प्रकार के कीट, पतंगे, कृमि एवं कुकुर्मुत्ते देखेंगे।

जंगली पुष्प

जंगली पुष्प
जंगली पुष्प

ऋतु के अनुसार जंगल में आप कई प्रकार के जंगली पुष्प देखेंगे, जैसे दुर्लभ एवं अनोखे जंगली आर्किड इत्यादि।

जंगल सफारी के प्रकार

जीप सफारी

जीप से जंगल सफारी
जीप से जंगल सफारी

जीप द्वारा राष्ट्रीय उद्यानों में सफारी करना, जंगल के जीवन का आनंद उठाने का सर्वाधिक लोकप्रिय साधन है। अधिकतर जंगल सफारी योजनाबद्ध रीत से प्रातःकाल एवं सान्झबेला में किये जाते हैं। सफारी का सही समय राष्ट्रीय उद्यान के पर्यावरण एवं वहां के नियमों पर निर्भर करता है। मेरी सलाह है कि आप अपनी सफारी पूर्व नियोजित कर लें क्योंकि अधिकतर प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यानों में वहां पहुंचकर टिकट प्राप्त नहीं हो पाता।

नौका सफारी

जंगल के मध्य नौका विहार
जंगल के मध्य नौका विहार

देश में कई ऐसे राष्ट्रीय उद्यान हैं जो नदी, तालाब अथवा ऐसे ही किसी जल स्त्रोत के समीप स्थित हैं। ऐसे कुछ राष्ट्रीय उद्यानों में नौका द्वारा भी सफारी करने का विकल्प उपलब्ध होता है। आप नौका में बैठकर अपने आसपास हरे भरे जंगल देख सकते हैं।

नौका सफारी पक्षियों के अवलोकन के लिए अति-उपयुक्त है क्योंकि पक्षी बहुधा जल स्त्रोत के समीप ही विचरण करते हैं। रही बात जंगली जानवरों की, तो वे जल पीने अथवा जल में बैठकर शीतल होने के लिए इन स्त्रोतों के समीप आते ही हैं।

रात की सफारी

रात की जंगल सफारी निशाचरों को देखने के लिए
रात की जंगल सफारी निशाचरों को देखने के लिए

निशाचर जंगली जानवरों एवं पक्षियों को देखने के लिए रात की सफारी सर्वोत्तम विकल्प है। ये जानवर आसानी से नहीं दिखाई देते। मुझे स्मरण है, ऐसे ही एक सफारी में हमें दो भालू दिखे थे। रात में उनकी आँखें चमक रही थीं।

रात की सफारी अनिवार्य रूप से जीप की सवारी होती है। यह सफारी प्रतिबंधित वन क्षेत्र की बाहरी सीमा पर स्थित मार्गों अथवा बफर क्षेत्रों पर ही की जाती है।

पैदल सफारी

आप अचरज में आ गए? जी हाँ! कई राष्ट्रीय उद्यानों में पैदल सफारी करने की अनुमति दी जाती है। इनमें सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान एक है। इस सफारी में आपके साथ वन पथप्रदर्शक, प्रकृतिविद एवं वन सहायकों का दल भी चलते हैं। वन प्रदर्शक को ना केवल जंगल के भीतर की पगडंडियों का ज्ञान होता है, वहां के जानवरों एवं पक्षियों का भी ज्ञान होता है। वे इन्हें ढूँढने में अत्यंत निपुण होते हैं। जंगल में उगती वनस्पतियों एवं वृक्षों की जानकारी भी वे रखते हैं।

पैदल जंगल सफारी
पैदल जंगल सफारी

यदि आप जिज्ञासु हैं तो उनसे एवं इन जंगलों से बहुत कुछ सीख सकते हैं। यह सफारी भी मुख्य वन में नहीं की जाती, बल्कि जंगल की बाहरी सीमा अथवा बफर क्षेत्र में की जाती है। चूंकि यह सफारी पैदल की जाती है, पैरों में आरामदेह जूते एवं सर पर टोपी अवश्य लें।

हाथी पर सफारी

हाथी पर सफारी अब कुछ ही स्थानों पर कराई जाती है। मैंने हाथी पर सफारी का आनंद पश्चिम बंगाल के जलदापारा राष्ट्रीय उद्यान में उठाया था। यह अपने आप में एक अनोखी सफारी थी। एक अद्भुत अनुभव था। इतनी ऊंचाई से जंगल का दृश्य अत्यंत रोमांचक होता है। ऊंची-नीची धरती पर हाथी का इतनी आसानी से चलना आश्चर्यजनक है।

हाथी पर जंगल सफारी
हाथी पर जंगल सफारी

अचानक मैंने अनुभव किया कि हम ऊंचे ऊंचे घास के मैदानों पर चल रहे थे। हमसे भी ऊंचे इन घास के बीच से केवल हाथी की पीठ पर बैठ कर ही जा सकते हैं। मध्यप्रदेश के बांधवगड राष्ट्रीय उद्यान में जीप सफारी के साथ हाथी सफारी भी कराई जाती है। हाथी द्वारा बाघ को अत्यंत समीप से देखा जा सकता है।

जंगल सफारी के लिए सर्वोत्तम राष्ट्रीय उद्यान

भारत के कई जंगलों में मैंने सफारी की है। अब भी कई राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव अभयारण्यों के दर्शन शेष हैं। अपने द्वारा किये गए जंगल सफारी में से मुझे जो सर्वोत्तम प्रतीत हुए, उनके विषय में यहाँ उल्लेख करना चाहती हूँ। इन्हें समझ कर कम से कम २-३ जंगल सफारी चुनिए जो भिन्न अनुभव प्रदान करने में सक्षम हैं। अपनी आगामी अवकाश में आप उन जंगल सफारी में से एक अवश्य कीजिये।

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान – मध्य प्रदेश

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान अर्थात् कान्हा बाघ संरक्षण क्षेत्र के जंगल में ही सर्वप्रथम मुझे जंगल के बाघ को अपने जंगली परिवेश में देखने का सुअवसर प्राप्त हुआ था। मध्य प्रदेश राज्य के १९०० वर्ग कि.मी. के क्षेत्र में पसरे कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में मध्य भाग एवं बाहरी भाग सीमांकित है। कहा जाता है कि कान्हा में बाघ के दिखने की संभावना सर्वाधिक है।

कान्हा का मुन्ना
कान्हा का मुन्ना

कान्हा का बाघों में बाघ, जिसे प्रेम से मुन्ना बुलाया जाता है, सर्वाधिक मित्रवत बाघ है। वह पर्यटकों से अत्यंत सहज है। वह हमारी जीप के समीप से शान्तिपूर्वक पदचाप करता निकल जाता था, हमारे मार्ग को काटता हुआ उस पार चला जाता था तथा अपनी जंगली प्रणाली से अपना क्षेत्र सीमांकित करता था। इस प्रकार वह पर्यटकों को आनंदित कर देता था।

और पढ़ें : मुन्ना– कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के बाघों में बाघ से एक भेंट

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान बारहसिंघों के लिए भी प्रसिद्ध है। इनके साथ साथ कान्हा में कई अन्य प्रकार के जंगली जानवर, पक्षियों की लगभग ३०० प्रजातियाँ तथा लगभग १००० प्रकार के पुष्पीय पौधे हैं।

और पढ़ें : कान्हा राष्ट्रीय उद्यान का मुझसे बतियाना सुनें

सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान – मध्य प्रदेश

जीप सफारी, नौका सफारी, पदयात्रा सफारी एवं रात्रि सफारी, इन सब सफारी का अप्रतिम आनंद हमने मध्य प्रदेश के इस सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान व बाघ संरक्षित क्षेत्र में उठाया। १४०० वर्ग कि.मी. के क्षेत्र में पसरे इस उद्यान के कई भाग हैं। यहाँ का एक अन्य विशेष आकर्षण है देनवा नदी का अप्रवाही जल। इस जल पर नौका विहार का आनंद लेते हुए आप प्रतिबंधित वन क्षेत्र के भीतर निर्बाध प्रवेश कर सकते हैं।

और पढ़ें: सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान में जीप सफारी

गाँव के समीप, वन के सीमावर्ती क्षेत्रों में आप पक्षी दर्शन का आनंद उठा सकते हैं। इसके लिए आवश्यक जानकारी प्राप्त कर, प्रातःकालीन पक्षीदर्शन अवश्य करें। हम जिस रेसॉर्ट में ठहरे थे, उसके उद्यान में हमने अनेक तितलियों को भी देखा। नवम्बर का महीना होने के कारण हमें कई आकर्षक रंगबिरंगी तितलियाँ दिखीं।

और पढ़ें: सतपुडा राष्ट्रीय उद्यान के जंगलों को जानने के ५ मार्ग

पेंच राष्ट्रीय उद्यान – मध्य प्रदेश

पेंच राष्ट्रीय उद्यान एवं बाघ संरक्षित क्षेत्र का नाम पेंच नदी पर रखा गया है जो इस जंगल के मध्य से बहती है। इस उद्यान में भी बाघ के दिखने की संभावना अत्यधिक है।

पेंच की कालर वाली बाघिन
पेंच की कालर वाली बाघिन

इस जंगल की प्रसिद्ध रानी बाघिन, जिसे प्रेम से कॉलरवाली बाघिन कहा जाता है, इस जंगल का मुख्य आकर्षण है। कॉलरवाली बाघिन ने अब तक २२ से भी अधिक शावकों को जन्म दिया है। यह अपने आप में एक इतिहास है। कुछ का मानना है कि कदाचित उसके २६ शावकों को जन्म दिया था। कॉलरवाली बाघिन भी पर्यटकों से अत्यंत सहज एवं निर्भय है। इसी कारण कई लोगों ने उसे अपने शावकों के संग अत्यंत समीप विचरण करते देखा। उन पर्यटकों में मैं भी एक हूँ।

और पढ़ें: कॉलरवाली बाघिन – पेंच राष्ट्रीय उद्यान की रानी

पेंच राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश राज्य के दक्षिणी सीमा पर स्थित है जहां वह महाराष्ट्र राज्य से जुड़ता है। इस उद्यान का ७५० वर्ग कि.मी. भाग मध्य प्रदेश में तथा ७०० वर्ग कि.मी. भाग महाराष्ट्र में है।

पेंच में मिला एक उल्लुओं का जोड़ा
पेंच में मिला एक उल्लुओं का जोड़ा

सफारी के समय आप पक्षियों की अनेक प्रजातियाँ यहाँ देख पायेंगे। इस उद्यान के सीमावर्ती गावों में भी आप कई प्रकार के पक्षी देख सकते हैं।

पेंच में मेरी सफारी के समय जो पक्षी मैंने देखे उनमें मुख्य आकर्षण थे, पीले सर वाला कठफोड़वा तथा भारतीय उल्लुओं का जोड़ा।

और पढ़ें: पेंच राष्ट्रीय उद्यान के पक्षी

पेंच राष्ट्रीय उद्यान एक अन्य आकर्षण था वृक्ष के ऊपर बना भव्य अतिथि कक्ष।

आसाम का नामेरी राष्ट्रीय उद्यान

आसाम एवं अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित नामेरी राष्ट्रीय उद्यान लगभग २०० वर्ग कि.मी के क्षेत्र में पसरा हुआ है। जिया भोरोली नदी एवं उसकी सहायक नदियाँ इसका पोषण करती हैं। नामेरी के उत्तर-पूर्वी छोर पर, अरुणाचल प्रदेश राज्य के भीतर पाखुई वन्यजीव अभ्यारण्य है। ये दोनों जुड़े अभ्यारण्य जंगली पशु-पक्षियों के लिए भरपूर साधन प्रदान करते हैं।

उत्तर-पूर्वी राज्यों के भ्रमण के समय मेरे पास समय की किंचित तंगी थी। सीमित समय में हम केवल नामेरी इको कैंप से जिया भोरोली नदी तक की प्रातःकालीन सफारी ही कर पाए। मुझे विश्वास है नामेरी राष्ट्रीय उद्यान में इसके अतिरिक्त भी बहुत कुछ था जो मैं देख नहीं पायी थी। नामेरी राष्ट्रीय उद्यान का प्रमुख आकर्षण हाथी हैं।

मध्य प्रदेश का बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान

बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में विश्व के सर्वाधिक बाघों की उपस्थिति मानी जाती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि आप यहाँ सफारी करते समय बाघ नहीं देख पाए तो यह आपका दुर्भाग्य होगा। मेरे विषय में यह सत्य सिद्ध हुआ। मैंने ताला एवं मगधी क्षेत्र में ३ सफारी किये किन्तु मैं बाघ नहीं देख पायी। परन्तु मैं निराश नहीं हुई। मैंने जंगल के अन्य आकर्षणों की ओर ध्यान केन्द्रित किया।

और पढ़ें: बाघों के परे बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के अन्य आकर्षण

बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में विष्णु की प्राचीन प्रतिमा
बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में विष्णु की प्राचीन प्रतिमा

४५० वर्ग कि.मी. के क्षेत्रफल में पसरा बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान का नामकरण बांधवगढ़ नामक एक प्राचीन दुर्ग पर किया गया है। इस उद्यान में स्तनपायी पशुओं की लगभग ३७, पक्षियों की ३५० तथा तितलियों की ८० प्रजातियाँ पायी जाती हैं। यह बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान तथा बाघ संरक्षित क्षेत्र को जीप व हाथी सफारी का उत्तम स्थान बनाता है।
बांधवगढ़ एक समय जीवित दुर्ग था। अतः इसका एक संपन्न इतिहास एवं विरासत है।

और पढ़ें: बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान का जीवन, इतिहास एवं विरासत

पश्चिम बंगाल का जल्दापारा राष्ट्रीय उद्यान

उत्तरी बंगाल क्षेत्र में हिमालय की तलहटी में जल्दापारा राष्ट्रीय उद्यान स्थित है। यह एकल सींग वाले गेंडे के लिए प्रसिद्ध है। २०० वर्ग कि.मी. के क्षेत्र में पसरा यह राष्ट्रीय उद्यान कई प्राकृतिक आरक्षित क्षेत्रों के समीप है, जैसे चिलापाटा नामक हाथी गलियारा, बुक्सा बाघ संरक्षित क्षेत्र तथा गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान।

बंगाल पर्यटन का होल्लोंग टूरिस्ट लॉज इस जंगल में रहने का सर्वोत्तम स्थान है। यहाँ से आप इसके समक्ष बहती छोटी सी नदी के उस पार एकल सींग वाले गेंडे, गौर, जंगली सूअर तथा हिरण देख सकते हैं। सैकड़ों पक्षी इसके ऊपर मंडराते रहते हैं।

होल्लोंग टूरिस्ट लॉज इकलौता स्थान है जहां जंगल में मुझे जीप सफारी के साथ हाथी सफारी का भी भरपूर आनंद प्राप्त हुआ।

और पढ़ें: होल्लोंग – जैव विविधता से परिपूर्ण दुआर्स का जल्दापारा राष्ट्रीय उद्यान

जी हाँ! रात होते ही एकल सींग वाले गेंडे होल्लोंग टूरिस्ट लॉज के समीप तक आ जाते थे। इससे पूर्ण इतने समीप से मैंने कभी किसी जंगली जानवर को नहीं देखा था।

उत्तराखंड का राजाजी राष्ट्रीय उद्यान

८०० वर्ग कि.मी. के क्षेत्रफल में पसरा राजाजी राष्ट्रीय उद्यान उत्तराखंड में हिमालय के चरणों में स्थित है। राजाजी राष्ट्रीय उद्यान का नामकरण भारतरत्न सी. राजगोपालचारी के नाम पर किया गया है जो भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे। हाथी, हिमालयी वन्य जीवन तथा पक्षी दर्शन के लिए यह उद्यान सर्वोत्तम राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है। भारत में पक्षियों की जितनी भी प्रजातियाँ हैं, उनमें से कम से कम एक तिहाई आप यहाँ एक उद्यान में ही देख सकते हैं।

और पढ़ें: राजाजी राष्ट्रीय उद्यान – चीला आरक्षित वन के वन्यजीवन का आनंद उठायें

भरपूर समय साथ लेकर यहाँ आईये तथा शांतिपूर्वक इस उद्यान का आनंद उठाईये।

तेलंगाना का पोचरम अभयारण्य

पोचरम बाँध द्वारा सृजित पोचरम झील पर इस अभयारण्य का नामकरण किया गया है। लगभग १०० वर्ग कि.मी. के क्षेत्र में पसरा तेलंगाना का यह अभयारण्य अपेक्षाकृत छोटा है। आप इस जंगल की पगडंडियों पर पदयात्रा करते हुए कई हिरण एवं पक्षी देख सकते हैं। यह अभयारण्य हैदराबाद से लगभग ४० कि.मी. की दूरी पर ही स्थित है। अतः आप हैदराबाद से दिवसीय यात्रा कर सकते हैं।

और पढ़ें: पोचरम अभयारण्य एवं बाँध – हैदराबाद से सप्ताहांत घुमक्कड़ी

राजस्थान का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान

भरतपुर पक्षी अभ्यारण्य में सारस अथवा क्रोंच पक्षी
भरतपुर पक्षी अभ्यारण्य में सारस अथवा क्रोंच पक्षी

राजस्थान का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, भरतपुर पक्षी अभयारण्य के नाम से अधिक प्रसिद्ध है। यहाँ आप पक्षियों की लगभग ३७० प्रजातियाँ देख सकते हैं। २९ वर्ग कि.मी. में पसरे इस दलदली क्षेत्र में कई प्रवासी पक्षी डेरा डालते हैं। पुष्पों की ३७९ प्रजातियाँ देख सकते हैं। सारस, नीलगाय, सियार, अजगर इत्यादि भी देख सकते हैं।

और पढ़ें: भरतपुर पक्षी अभयारण्य

भरतपुर अभयारण्य के भीतर पक्के मार्ग हैं जिन पर सूर्योदय से सूर्यास्त के भीतर सफारी की अनुमति दी जाती है। पैदल, सायकल, घोड़ागाड़ी तथा सायकल रिक्शा द्वारा पर्यटक इस अभयारण्य का अवलोकन कर सकते हैं। हमने सर्वप्रथम सायकल रिक्शा द्वारा अभयारण्य की सफारी की। तत्पश्चात अभयारण्य के भीतर ११ कि.मी. लम्बे मार्ग पर पदयात्रा करते हुए अभयारण्य का सविस्तार अवलोकन किया। यदि आप में सहनशक्ति है तो इस अभयारण्य को जानने हेतु पैदल सफारी ही सर्वोत्तम विकल्प है।

आसाम का काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान

एक सींग वाले गैंडे का बच्चा
एक सींग वाले गैंडे का बच्चा

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान युनेस्को द्वारा घोषित एक विश्व विरासती स्थल है जहां विश्व के लगभग दो-तिहाई एकल सींग गेंडों का वास है। इनके अलावा बाघ, हाथी, जंगली दलदलीय भैंसों इत्यादि के लिए भी यह महत्वपूर्ण स्थान है। ८०० वर्ग कि.मी. के क्षेत्र में पसरा यह राष्ट्रीय उद्यान आसाम के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है। एक एकल सींग मादा गेंडे को उसके शावक के संग हमारे जीप के अत्यंत समीप देखने का सौभाग्य हमें काजीरंगा में ही प्राप्त हुआ था। यहाँ ३-४ क्षेत्र हैं जहां प्रातःकालीन एवं दोपहर की जीप सफारी कराई जाती है। हाथी की सवारी करते हुए भी सफारी का आनंद उठाया जा सकता है।

और पढ़ें: काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान – एकल सींग गेंडों का महत्वपूर्ण स्थान

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को आड़ी-तिरछी रखाओं में कई नदियाँ काटती हैं। इनमें ब्रह्मपुत्र नदी प्रमुख है।

राजस्थान का सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान एवं बाघ संरक्षित क्षेत्र

८६६ वर्ग कि.मी. के क्षेत्र में फैला यह अभयारण्य राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है। यहाँ हमने जीप सफारी की थी किन्तु बाघ देख पाने में दुर्भाग्यशाली सिद्ध हुए थे। फिर भी हमने यहाँ भरपूर आनंद उठाया। हमने यहाँ कई पक्षी एवं जल स्त्रोतों के समीप कई मगरमच्छ ढूंडे। घने जंगल की छत्रछाया के नीचे से गाड़ी चलायी जहां सूर्य की किरणें भी क्वचित ही पहुँच पाती हैं।

गोवा का बोंडला अभयारण्य

८ वर्ग कि.मी. के क्षेत्र में पसरा, गोवा राज्य के उत्तर-पूर्वी परिक्षेत्र में स्थित बोंडला अभयारण्य में एक चिड़ियाघर, एक मृगवन, एक वनस्पति उद्यान तथा भरपूर पक्षी अवलोकन के सुअवसर हैं। इस छोटे से अभयारण्य में केवल पैदल चलकर ही आनंद लिया जा सकता है। अतिउत्साही पर्यटकों के लिए अभयारण्य जंगल में पैदल यात्रा भी आयोजित करता है।

और पढ़ें: बोंडला अभयारण्य एवं चिड़ियाघर – गोवा का पर्यटन आकर्षण

उत्तराखंड का जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान

उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले में लगभग १३१८ वर्ग कि.मी. के क्षेत्र में फैला यह जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान भारत के प्राचीनतम राष्ट्रीय उद्यान एवं बाघ संरक्षित क्षेत्र में से एक है। पर्यटक यहाँ मुख्यतः बाघ एवं जंगली हाथी देखने आते हैं। यहाँ स्तनपायी जानवरों की लगभग ५० प्रजातियाँ एवं पक्षियों की लगभग ५८० प्रजातियाँ हैं।

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में चितकबरे हिरण
जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में चितकबरे हिरण

यहाँ प्रमुख रूप से जीप सफारी कराई जाती है जो उद्यान के कई भागों में पृथक रूप से आयोजित की जाती हैं। चूंकि यह एक अत्यंत फैला हुआ उद्यान है, यहाँ कई बार सफारी के समय बाघों के दर्शन नहीं हो पाते। मैं भी उनमें से एक हूँ। अतः मैं आपको एक से अधिक सफारी करने का सुझाव देती हूँ। पैदल सफारी की अनुमति केवल बफर जोन में ही है। यहाँ की वनस्पति, जीव एवं जंतुओं के अवलोकन हेतु पैदल सफारी सर्वोत्तम उपाय है।

कर्नाटक का बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान

कर्नाटक राज्य के चामराजनगर जिले में लगभग ९१२ वर्ग कि.मी. के क्षेत्र में पसरा बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान एवं बाघ संरक्षित क्षेत्र कदाचित दक्षिण भारत का सर्वोत्तम राष्ट्रीय उद्यान है। इस उद्यान के आसपास स्थित नागरहोले एवं मदुमलाई राष्ट्रीय उद्यान, वायनाड अभयारण्य तथा निलगिरी संरक्षित जैव मंडल इस सम्पूर्ण क्षेत्र को भारत में बाघों एवं हाथियों का विशालतम संग्रह बनाता है। जीप एवं बस द्वारा यहाँ जंगल सफारी आयोजित की जाती है।

यह उद्यान वनस्पतियों, जीव-जंतुओं पक्षियों तथा तितलियों से परिपूर्ण है।

कर्नाटक का दान्डेली अभयारण्य

मलाबारी चितकबरे धनेश एवं मलाबारी विशाल गिलहरियों से भरा दान्डेली अभयारण्य कर्नाटक के पश्चिमी घाट के ऊपर स्थित है। उत्तरी कन्नड़ जिले के ८६६ वर्ग कि.मी. के क्षेत्र में फैला यह अभयारण्य एक बाघ संरक्षित एवं हाथी संरक्षित क्षेत्र है। यहाँ जीप सफारी करते समय हमने कई गीदड़ों एवं नेवलों को ढूंडा। एक दर्शन स्थल से पश्चिमी घाट के घने विशाल जंगल की हरियाली देखकर दंग रह गए। आप यहाँ जीप सफारी ले सकते हैं जो सूर्योदय से पूर्व तथा संध्या के समय की जाती हैं।

और पढ़ें: मलाबारी चितकबरे धनेश के भरा दान्डेली अभयारण्य

इस अभयारण्य के समीप से काली नदी बहती है। बाँध के जल से पोषित इस नदी में १२ महीने भरपूर जल बहता है। इसी कारण यह नदी एवं इसकी झीलें कई जलक्रीडाओं का केंद्र भी है। आप जंगल सफारी के साथ इन जल क्रीडाओं का भी आनंद ले सकते हैं। पक्षी अवलोकन के लिए भी यह उत्तम स्थान है। यहाँ आप २००से भी अधिक पक्षियों की प्रजातियाँ ढूंड सकते हैं।

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उत्तराखंड का बिनसर अभयारण्य

चलिए पर्यावरण का संरक्षण करें - बिनसर उत्तराखंड
चलिए पर्यावरण का संरक्षण करें – बिनसर उत्तराखंड

उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में अल्मोड़ा से लगभग ३५ कि.मी. दूर स्थित बिनसर अभयारण्य का क्षेत्रफल लगभग ४५ वर्ग कि.मी. है। बिनसर के जंगल में जीप सफारी एवं पैदल सफारी दोनों उपलब्ध है। हमने यहाँ पैदल सफारी की थी। इस जंगल को जानने के लिए यहाँ की वनस्पतियों एवं पशु-पक्षियों के मध्य पैदल सफारी सर्वोत्तम है। बिनसर अभयारण्य हिमालय दर्शन के लिए भी अत्यंत प्रसिद्ध है। अभयारण्य के भीतर स्थित कुमाऊं मंडल विकास निगम के अतिथिगृह से एवं जीरो-पॉइंट से हिमालय का अकल्पनीय दर्शन प्राप्त होता है।

और पढ़ें: कुमाऊं, उत्तराखंड के बिनसर से दीप्तिमान हिमालय के भव्य दर्शन

पहाड़ पर स्थित होने के कारण इस अभयारण्य में संकरी पगडंडियाँ हैं। यहाँ आप हिमालयी जंगली जानवरों को तो देख ही सकते हैं, साथ ही पहाड़ी शुद्ध वायु में पनपते वृक्ष एवं वनस्पतियों के भी दुर्लभ दर्शन कर सकते हैं। इस अभयारण्य में पक्षियों की भी कई प्रजातियाँ दिख जाती हैं।

जंगल सफारी का सही समय

किसी भी जंगल के भीतर सफारी करने का सर्वोत्तम समय प्रातःकाल, संध्या तथा रात्रि का समय होता है। ऐसा देखा गया है कि प्रातःकाल सूर्योदय के समय अधिकतर जंगली प्राणियों के दुर्लभ दर्शन हो जाते हैं। रात की सफारी में निशाचर प्राणियों को देखा जा सकता है।

जंगल सफारी के लिए कुछ आवश्यक जानकारियाँ:

• जंगल सफारी के समय कुछ भी खाद्य पदार्थ अपने साथ ना ले जाएँ।
• जंगल में भ्रमण केवल वन विभाग कर्मियों एवं प्रशिक्षित कर्मचारियों के संग ही करें।
• जंगल सफारी करने से पूर्व वन विभाग के अनुमति लेकर उनके दिशा-निर्देश में ही सफारी करें।
• जंगल में स्वयं भ्रमण करने कदापि ना निकलें।
• चटक एवं चमकीले रंग के वस्त्र धारण ना करें। इससे जंगली प्राणी डरकर दूर चले जाते हैं अथवा छुप जाते हैं। जंगल के परिवेश से मिलते जुलते वस्त्र ही पहनें।
• जंगल में गाना-बजाना ना करें। ना ही किसी अन्य प्रकार का शोर करें। इससे भी प्राणी दूर भाग जायेंगे। जंगल के संगीत पर ध्यान केन्द्रित करें। यह आपको अन्यथा नहीं सुनायी देंगे।
• जंगल सफारी के समय दूरबीन अवश्य साथ ले लें। इससे आप जंगली परिवेश एवं यहाँ के जीव-जंतुओं को समीप से देख सकेंगे।
• जानवरों को त्रास ना दें, ना ही उन्हें कुछ खिलाएं।
• जानवरों के समीप जाने का प्रयास ना करें। जानवरों के अपने सुरक्षित घेरे होते हैं। उस घेरे के समीप जाने पर वे भाग सकते हैं तथा कुछ दशाओं में वे आक्रामक भी हो सकते हैं। उनके क्षेत्र का आदर दें।
• जंगलों की पगडंडियाँ बहुधा ऊंची-नीच, घुमावदार एवं संकरी होती हैं। इन पर जीप द्वारा भ्रमण करते समय स्वयं का ध्यान रखें ताकि जीप के किसी भाग से आपको चोट ना पहुंचे। चौकस रहें तथा जीप की डंडी को कसकर पकड़ें।
• जंगल सफारी की जीप अधिकतर बंटवारे के आधार पर दिया जाता है। यदि आप समूह में भ्रमण कर रहें हैं तो पूर्ण जीप आपको दी जा सकती है।
• जीप सफारी करने से पूर्व इसके शुल्क की जानकारी प्राप्त कर लें। साथ ही इनकी अग्रिम बुकिंग कर लें ताकि वहां जाकर निराशा ना हो।
• अन्य सफारी के विषय में भी पूर्व जानकारी एकत्र करें। अपनी इच्छानुसार सफारी का चयन करें।
• प्रातःकालीन एवं रात्रि सफारी के समय शीतल वायु असहनीय हो सकती है। अतः सफारी के समय गर्म वस्त्र साथ ले लें। दोपहर की सफारी के समय टोपी भी अवश्य लें।
• जंगली जानवर अपने परिवेश में अपने नियमों से जीवन जीते हैं। अतः किसी भी जंगल में इन जानवरों के दिखने की गारंटी कोई नहीं दे सकता है। यदि आप बाघ, तेंदुआ अथवा अन्य दुर्लभ प्राणी ना देख पायें तो निराश ना होइये। जंगल के अन्य आकर्षणों का भी ध्यानपूर्वक अवलोकन करें। शहरी परिवेश में यह असंभव है।

छुट्टियों में जंगल सफारी की योजना

सामान्यतः वर्षा ऋतु में सभी राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्य पर्यटकों के लिए बंद होते हैं। भारत में वर्षा ऋतू की समयावधि विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न भिन्न होती है। अन्य समय में यहाँ सप्ताह में एक दिन तथा किसी राष्ट्रीय/स्थानीय उत्सवों में छुट्टी हो सकती है। अतः वन विभाग से प्रवेश की अग्रिम अनुमति एवं सफारी बुकिंग अवश्य प्राप्त कर लें। आप यह उनके वेबस्थल से प्राप्त कर सकते हैं अथवा आपने टूर ऑपरेटर या अपने होटल द्वारा भी इसकी व्यवस्था कर सकते हैं।

सफारी करने के लिए आपको राष्ट्रीय उद्यान का प्रवेश शुल्क, जीप का किराया तथा परिदर्शक का शुल्क देना पड़ेगा। वन्य जीवन प्रशिक्षण प्राप्त परिदर्शक आपको वन्य जीव-जंतु देखने में अत्यंत सहायक होते हैं। साथ ही वे आपको वन्य जीवन के विषय में आवश्यक जानकारी भी देते हैं।

प्रातःकालीन एवं दोपहर की जीप सफारी की व्यवस्था सामान्यतः उपलब्ध होती है। कई अभयारण्यों में हाथी सफारी, नौका सफारी, रात्री सफारी तथा पैदल सफारी की भी व्यवस्था होती है। इनके विषय में एवं इनके समय की पूर्ण जानकारी अवश्य प्राप्त करें। तत्पश्चात अपनी इच्छानुसार सफारी का चयन कर अग्रिम बुकिंग कर लें। सफारी के समय आपका परिचय पत्र तथा राष्ट्रीयता प्रमाण साथ रखें।

भारत के विभिन्न भौगोलिक भागों में भिन्न वन क्षेत्र हैं तथा उनमें भिन्न भिन्न ऋतुओं में सफारी की समयावधि भी भिन्न होती हैं। सफारी की योजना बनाते समय इन सब तथ्यों का अवश्य ध्यान रखें।

जंगल सफारी करने के पश्चात अपना अनुभव हमसे बांटना ना भूलें।

अनुवाद: मधुमिता ताम्हणे

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मुन्ना बाघ – मध्यप्रदेश के कान्हा राष्ट्रीय उद्यान का प्रसिद्ध सितारा https://inditales.com/hindi/kanha-national-park-munna-tiger/ https://inditales.com/hindi/kanha-national-park-munna-tiger/#respond Wed, 01 Feb 2017 02:30:38 +0000 https://inditales.com/hindi/?p=129

मैंने भारत भर के राष्ट्रीय उद्यानों में अनेक सवारियां की हैं। इस सब वन्य जीवन की सफारियों के दौरान किसी बाघ को उसके प्राकृतिक परिवेश में देखने का भाग्य अब तक नहीं मिला था। और सच कहूँ , मुझे उनके सामने जाने में काफी डर लगता था। एक तरफ दिल नहीं चाहता की वह मेरे […]

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मैंने भारत भर के राष्ट्रीय उद्यानों में अनेक सवारियां की हैं। इस सब वन्य जीवन की सफारियों के दौरान किसी बाघ को उसके प्राकृतिक परिवेश में देखने का भाग्य अब तक नहीं मिला था। और सच कहूँ , मुझे उनके सामने जाने में काफी डर लगता था। एक तरफ दिल नहीं चाहता की वह मेरे सामने आए, और दूसरी तरफ, जिज्ञासावश आँखें उन्हें ढूँदती भी रहती हैं। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के कारण मेरा यह भय भी दूर हो गया। यहां पर मेरी मुलाक़ात इस जंगल के मशहूर बाघ से हुई जिसे प्यार से सब मुन्ना बुलाते हैं।

Munna Tiger - Kanha National Park

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान का चमकता हुआ सितारा – मुन्ना बाघ

मुन्ना बाघ - कान्हा राष्ट्रीय उद्यान
मुन्ना बाघ – इतनी पास की दिल दहल जाये

हमारी मुलाकात जून की तपती हुई दोपहर में इस उद्यान की दूसरी जंगल सफारी के दौरान हुई। जब मैं इस वन्य सफारी पर जाने के लिए गाड़ी में बैठी, तब तक मैंने बाघ दिखने की सारी आशाएँ छोड़ दी थी। आखिरकार, बांधवगढ़ में 3 सफारियों के बाद और कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की सुबह की सफारी के बाद भी मैंने उन्हें नहीं देखा। यहां पर एक बात का उल्लेख मैं जरूर करना चाहूंगी कि मैंने इस जंगल और उसकी विभिन्नता का भरपूर आनंद उठाया। बाघों से मुलाक़ात न होने पर भी मुझे कोई शिकायत नहीं थी। हाँ,  मन में यह कौतुहल अवश्य था कि इस बार भी हमें बाघ के दर्शन होंगे या नहीं।

मुन्ना बाघ - कान्हा राष्ट्रीय उद्यान
पास से

हमारी जीप

जब हमारी जीप कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के निर्धारित मार्ग से जा रही थी, हमारे वन गाइड मित्र ने बड़े अधिकार से कहा की आज आपको बाघ जरूर दिखेगा। हम सब ने उसकी बात हंसी में टाल दी। हमें यह शब्द सुनने की आदत जो हो चुकी थी। हर गाइड हमें बाघ दिखाई देने की कहानियाँ सुनाकर हमारी आशाओं को बढ़ा देते थे। यह कहने पर भी कि हम बाघों को देखने के लिए उतावले नहीं हैं, फिर भी वे हठ करते हैं कि अगर आप इस वन में आए हैं तो आपको बाघ जरूर देखने चाहिए। हमारे गाइड ने ड्राईवर से वह रास्ता लेने को कहा जहां पर उन्हें सुबह के समय मुन्ना बाघ के दिखाई देने की सूचना मिली थी।

मैंने मन में सोचा कि आप कैसे कह सकते हैं कि कोई जानवर 4-5 घंटों बाद भी उसी जगह पर मिलेगा, जबकि वह जंगल में कभी भी कहीं भी घूम सकता है। उसी समय मुझे अपना मंत्र याद आया कि हमे स्थानीय ज्ञान को हमेशा सम्मान देना चाहिए।

मुन्ना बाघ को इसी उद्यान के एक वन गाइड का नाम दिया गया है। यहां के लगभग सभी बाघों के नाम रखे गए हैं और आम तौर पर उनके नामकरण के पीछे कोई दिलचस्प सी कहानी होती है।

मुन्ना की पहली झलक

मुन्ना बाघ

एक जगह पर अचानक से हमने बहुत सारी जीपों को खड़े देखा। अब हमें एहसास हुआ की मुन्ना बाघ की सूचना विश्वस्त है। इन लोगों को जरूर पता होगा कि बाघ यहीं-कहीं आस-पास ही है। प्रत्येक जीप बारी-बारी से एक विशेष स्थान पर जाकर आगे बढ़ती थी। इन जीपों पर लगे कैमरे उस स्थान पर बन्दूक की गोलियों की तरह तस्वीरें खींच रहे थे। यानि बाघ जंगल में कहीं आस-पास ही है और किसी विशेष स्थान से ही दिखाई दे रहा है। समय रहते हमारी बारी आयी और मुन्ना से हमारी मुलाक़ात हुई। मुन्ना बाघ अपनी जगह पर बैठे-बैठे जम्हाई ले रहा था। वह उदास सा दिखाई दे रहा था, या शायद वह अभी-अभी नींद से जागा था।

मुन्ना सड़क से लगभग 10-15 मीटर की दूरी पर बैठा था, जहां से वह ठीक से नज़र भी नहीं आ रहा था। सभी लोगों द्वारा मुन्ना के दर्शन होने के बाद भी जीपें अभी भी वहीं खड़ी थी, जैसे किसी का इंतज़ार कर रही हो।

हमारे गाइड और ड्राईवर ने हमें बताया कि यह मशहूर बाग मुन्ना अभी-अभी नींद से जागा है और अब वह पूरे जंगल की लंबी सैर पर जाएगा। मेरा तर्कसंगत मन सोचने लगा कि कैसे ये लोग इतने निश्चित रूप से इतना सब जान सकते हैं, लेकिन बाद में मुझे लगा कि ये लोग उसे रोज़ देखते हैं और इसी कारण उसकी आदतों से भी जरूर परिचित होंगे। शायद यह मुन्ना की रोज़ की दिनचर्या होगी।

मुन्ना की चहलकदमी

मुन्ना बाघ - अपना अधिकार क्षेत्र अंकित करता हुआ
अपना अधिकार क्षेत्र अंकित करता हुआ

कुछ ही मिनटों में यह सारी जगह उन्माद से भर गयी। मुन्ना कुछ देर सुस्ता कर उठ गया था। उसने पास के कुछ पेड़ों को नोचा और सुस्त आलसी गति से चलने लगा। जीपों ने आगे पीछे हो उसके लिए रास्ता बनाया। वह झाड़ियों से बाहर निकलकर वहां पर खड़ी जैतुनी रंग की जीपों को ताड़ने लगा। वहां पर मौजूद सभी लोग उसकी झलक पाने के लिए इकठ्ठा होने लगे। मुन्ना चलते-चलते पेड़ों के पास से गुजरते हुए, सड़क पर घूमते हुए अपने क्षेत्र का अंकन करने लगा। वह बीच-बीच में रुककर उत्सुकता से उसकी तस्वीरें खीच रहे लोगों को देख रहा था।

मुझे लगा जैसे उसने रोज़ पर्यटकों का सामना करते हुए तस्वीरों के लिए अच्छे से पोज करना भी सीख लिया है। या फिर वह हमारे साथ ऐसा व्यवहार कर रहा है जैसा हम अपने बालकनी में बैठे पक्षियों के साथ करते हैं, जो कुछ समय के लिए आकर बैठते हैं और फिर चले जाते हैं। और हम उन्हें तब तक वहां पर बैठने देते हैं जब तक वे कोई बाधा न उत्पन्न करे।

शोर के कारण चिड़चिड़ाहट

मुन्ना बाघ की राजसी चाल
राजसी चाल

मुन्ना बाघ को देखने के लिए लोग बहुत शोर कर रहे थे। जीपें उसके बहुत नजदीक जाती थीं तो उस समय उसके चेहरे पर चिड़चिड़ाहट साफ दिखाई देती थी। जैसे किसी वयस्क व्यक्ति के आस-पास बहुत सारे बच्चे शोर मचा रहे हो, जिसके कारण वह व्यक्ति चिड़चिड़ा सा हो जाता है। आप चाहते तो हैं कि वे चुप हो जाए, लेकिन आप उन्हें चुप कराने के लिए कुछ नहीं करते। एक पल ऐसा आया जब मुन्ना हमारी जीप से कुछ ही मीटर की दूरी पर था। उसने मेरी आँखों में आँखें डालकर मुझे देखा। मैं अपने साथ वाले यात्री को लगभग जीप से बाहर धकेलते हुए पीछे सरक गयी।

मैं भयभीत हुई कि शायद उसे मुझमें अपना अगला शिकार दिखाई दे रहा है और वह मुझे मारने की योजना बना रहा हैं। शुक्र है कि हमारी जीप वहां से आगे बढ़ी और मैं उसकी नज़रों से दूर हो गयी। तब जाकर मैंने राम नाम लिया और उसके बाद शांत बैठ कर  उसे दूर से निहारा।

पर्यटकों से बेपरवाह मुन्ना बाघ
पर्यटकों से बेपरवाह

लंबी सैर के बाद मुन्ना बाघ थोड़ी देर के लिए बैठ गया और वापस उठकर सड़क के उस पार जहां पर जीप ले जाने की अनुमति नहीं है, उस ओर सैर के लिए निकल पड़ा। उसकी चाल एकदम जंगल के राजा की चाल थी। इससे यह स्पष्ट था कि यह उसका क्षेत्र है और यहां पर उसी का राज्य चलता है। बाकी सब को उसके लिए रास्ता बनाना पड़ता है। लगभग एक घंटे के लिए उसने बाघ सफारी पर आए हर व्यक्ति का ध्यान अपनी ओर केंद्रित रखा। लोगों की आँखें सिर्फ और सिर्फ मुन्ना को ही देखना चाहती थीं।

मशहूर बाघ मुन्ना का विडियो

यह विडियो जरूर देखिये जो मैंने बाघ सफारी के दौरान लिया था।

बाघ की खास पहचान है उसके माथे पर साफ-साफ लिखा हुआ सी ए टी (कैट) और उसके ठीक नीचे पी एम लिखा हुआ है।

मुन्ना – कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में जीप सफारी
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में जीप सफारी

हमें बताया गया कि यहां के वन गाइड पर्यटकों को सिर्फ मशहूर मुन्ना के ही इतने नजदीक जाने की इजाजत देते हैं क्योंकि, वे उसके व्यवहार से भलीभाँति परिचित हैं। वह बहुत बूढ़ा हो गया है और बेपरवाह है। उसे अपने आस-पास के लोगों से कोई फर्क नहीं पड़ता। यहां के वन गाइड उसके साथ मित्र के जैसा व्यवहार करते हैं। उन्हें मुन्ना की आदतें, उसकी पसंद, नापसंद अच्छे से मालूम है। और क्यों न हो, आखिरकार मुन्ना की एक झलक पाने के लिए ही तो पर्यटक यहां पर आते हैं। जो लोग यहां की पर्यटन अर्थव्यवस्था के सहारे अपनी जीविका चलाते हैं, उनकी उपजीविका का यह प्रमुख स्त्रोत है।

मुन्ना जैसे बाघ ही हैं जो अपनी उपस्थिती से वन्य जीवन की सफारी पर आए लोगों के चेहरे पर मुस्कुराहट लाते हैं। चाहे कुछ लोग उसे देखकर थोड़े से डर भी जाएँ। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की इस बाघ सफारी के दौरान मुन्ना बाघ की एक झलक से जुड़ी न जाने कितनी स्मृतियाँ होगी जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के कच्चे रास्स्ते
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के कच्चे रास्स्ते

बाघ के इतने नजदीक जाकर तथा अपने आस-पास के मनुष्यों के साथ उसका व्यवहार देखकर जो सबसे बड़ी सीख जो मैंने सीखी वह यह है, कि आप मनुष्यों की तरह बाघों के हाव-भाव भी पढ़ सकते हैं। बाघ को देखने का सारा कौतुहल समाप्त होने के बाद यही बातें हैं जो हमेशा मेरे साथ रहेंगी। अगर आपको कभी भी बाघों को करीब से देखने का मौका मिले तो इस बात पर जरूर ध्यान दीजिये।

मुन्ना, तुम सच में एक चमकता हुआ सितारा हो।

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