पक्षी विहार Archives - Inditales श्रेष्ठ यात्रा ब्लॉग Fri, 16 Aug 2024 03:05:19 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.4 कुमाऊँ के मनमोहक पक्षी – उत्तराखंड में प्रकृति का आनंद https://inditales.com/hindi/kumaon-ke-manmohak-pakshi/ https://inditales.com/hindi/kumaon-ke-manmohak-pakshi/#respond Wed, 12 Feb 2025 02:30:09 +0000 https://inditales.com/hindi/?p=3766

भारत के पर्वतीय राज्य उत्तराखंड को प्रकृति ने अनेक अद्भुत उपहारों से अलंकृत किया है। उनमें से एक है, इस प्रदेश के मनमोहक पक्षी। भारतीय उपमहाद्वीप में पाए जाने वाले पक्षियों की विविध प्रजातियों में से लगभग ७०० प्रजातियाँ उत्तराखंड में भी देखी गयी हैं। अब तक मैंने देवभूमि उत्तराखंड में जितने भी भ्रमण किये […]

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भारत के पर्वतीय राज्य उत्तराखंड को प्रकृति ने अनेक अद्भुत उपहारों से अलंकृत किया है। उनमें से एक है, इस प्रदेश के मनमोहक पक्षी। भारतीय उपमहाद्वीप में पाए जाने वाले पक्षियों की विविध प्रजातियों में से लगभग ७०० प्रजातियाँ उत्तराखंड में भी देखी गयी हैं।

चील
चील

अब तक मैंने देवभूमि उत्तराखंड में जितने भी भ्रमण किये हैं, मेरी भ्रमण सूची हिमालय, सूर्योदय के दृश्यों, वहाँ के परिदृश्यों आदि के चारों ओर ही केन्द्रित रही है। यद्यपि उत्तराखंड में पाए जाने वाले भिन्न भिन्न मनभावन पक्षियों के दर्शन करने की मेरी अभिलाषा सदा से थी, तथापि मैं वहाँ के पक्षियों के दर्शन के उद्देश्य से एक विशेष यात्रा का नियोजन अब तक नहीं कर पायी हूँ।

पूर्णरूपेण ना सही, कुमाऊँ के पक्षियों पर सरसरी दृष्टि डालने का अवसर मुझे अवश्य प्राप्त हुआ। कुमाऊँ के इन मनमोहक पक्षियों ने मुझे इस प्रकार मंत्रमुग्ध किया कि मैंने पक्षी दर्शन के उद्देश्य से भविष्य में एक पूर्वनियोजित भ्रमण करने का निश्चय अवश्य कर लिया है।

कुमाऊँ में विविध पक्षियों के दर्शन

जब तक कुमाऊँ में पक्षी दर्शन हेतु विशेष भ्रमण की मेरी योजना यथार्थ में परिवर्तित नहीं हो जाती, आईये मैं कुमाऊँ क्षेत्र के कुछ ऐसे पक्षियों से आपका परिचय कराती हूँ जिन्होंने मेरे पूर्व भ्रमण में मुझे अपने दर्शन देकर अनुग्रहीत किया था।

काठगोदाम

कुमाऊँ में हमारे सड़क भ्रमण का प्रथम पड़ाव था, काठगोदाम। हल्दवानी पार कर हम काठगोदाम पहुँचे। यहीं से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र आरम्भ होते हैं। दिल्ली से लम्बी यात्रा कर जब हम यहाँ पहुँचे, हमारी क्षुधा अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुकी थी। दोपहर के भोजन के लिए हम नदी के तट पर स्थित एक जलपानगृह पर रुके। अकस्मात् ही सुग्गों की किलबिलाट ने हमारा ध्यान आकर्षित किया। नदी के दूसरे तट पर दर्रे के भीतर बैठे दर्जन भर लाल सर वाले टुइयाँ सुग्गे अथवा टुइयाँ तोते (Plum-Headed Parakeet) चहचहा रहे थे। कुछ क्षणों पश्चात हमने एक ओकाब (Steppe Eagle) को नदी के ऊपर उड़ते हुए देखा। वह हमारे जलपानगृह के छज्जे के अत्यंत निकट उड़ रहा था। इस प्रकार अनायास ही हमारा पक्षी दर्शन आरम्भ हो गया था।

भीमताल

काठगोदाम से कुछ दूरी पार कर हम भीमताल पहुँचे। कुमाऊँ मंडल विकास निगम के विश्राम गृह में ठहरने की सर्व औपचारिकताएं पूर्ण करने के पश्चात हम नौकुचिया सरोवर पहुँचे। वहाँ रामचिरैया (Kingfisher) से लेकर काले बगुलों (Heron) की विविध प्रजातियों तक अनेक पक्षी थे। जल क्रीड़ाओं एवं हंसों के एक विशाल समूह ने हमें मंत्रमुग्ध कर रखा था। कुछ नन्हे बालक-बालिकाएं सरोवर के जल में बिस्कुट के टुकड़े डाल रहे थे जिनसे आकर्षित होकर अनेक हंस वहाँ एकत्रित हो गए थे। टुकड़े समाप्त होने पर वे कलरव करते हुए उनसे अधिक भोजन की मांग कर रहे थे। उनका पीछा करते हुए वे सरोवर के सोपानों तक पहुँच गए थे।

अगले दिवस प्रातः काल हम अपने विश्राम गृह के उद्यान में बैठकर अपनी प्रातःकालीन चाय की प्रतीक्षा कर रहे थे कि अकस्मात् ही हमें पक्षियों की किलबिलाट सुनाई पड़ी। वहाँ हमने अनेक पक्षियों को देखा। उनमें से कुछ ऐसे पक्षी थे जिन्हें हम सर्वप्रथम प्रत्यक्ष देख रहे थे। इससे पूर्व हमें उन पक्षियों को देखने एवं उनके चित्र लेने का अवसर प्राप्त नहीं हुआ था। वहाँ लाल चोंचधारी नीली मैगपाई (Red- Billed Blue Magpie), हिमालयी बुलबुल, पहाड़ी बुललचष्म (Scarlet Minivet) तथा जंगली मैना जैसे अनेक पक्षी दृष्टिगोचर हुए।

भीमताल के निकट पदभ्रमण करने के पश्चात हम सातताल पहुँचे। यहाँ हमने कुछ जलक्रीड़ाओं का आनंद उठाया। सरोवर के सानिध्य में पदभ्रमण किया। वहाँ हमें कौए के समान श्याम वर्ण पक्षी अनवरत दिखाई पड़ रहे थे। किन्तु उनका आचरण कौओं के समान प्रतीत नहीं हो रहा था। साधारणतः कौए भोजन की अपेक्षा में मानवों के समीप मंडराते रहते हैं। किन्तु ये पक्षी हमसे लुका-छिपी खेल रहे थे। उनके चित्र लेने के हमारे सर्व प्रयास निष्फल हो रहे थे। अंततः उनके कुछ चित्र लेने में हम सफल हुए। उन चित्रों को देख विशषज्ञों ने हमें जानकारी दी कि वह पक्षी सीटी बजाने वाला नीलवर्ण कस्तुरा (blue-Whistling Thrush) था। मुक्तेश्वर

हमारा अगला पड़ाव था, मुक्तेश्वर। प्रातः सूर्योदय से पूर्व ही हम विश्राम गृह से चल पड़े थे। हिमालय के पर्वत शिखरों के मध्य से उगते सूर्य को देखने की अभिलाषा थी। अप्रतिम सूर्योदय के दर्शन तो हुए ही, साथ ही भिन्न भिन्न पक्षियों को देख रोम रोम आनंदित हो गया। हमें वहाँ अनेक श्याम शीर्षा वनकाग (Black-Headed Jay), धूसर पिद्दा (Grey Bush Chat), बबूना (Oriental White-Eye), हिमालयी बुलबुल, मस्जिद अबाबील (Striated Swallow), गौरैया (Russet-Sparrow) आदि के दर्शन हुए। अप्रतिम सूर्योदय के दर्शन के पश्चात पदभ्रमण करते हुए हमें कठफोड़वा (Rufous-Bellied Woodpecker) के दर्शन का आनंद प्राप्त हुआ।

बिनसर

हिमालय पर्वत श्रंखलाओं का निकट से दर्शन करने के लिए हमने बिनसर में पड़ाव डाला। वहाँ अनेक अचम्भे हमारी प्रतीक्षा कर रहे थे। हमने वहाँ काला तीतर (Black Francolin) देखा जो हमें देखते ही तुरंत कहीं जाकर छुप गया। वहाँ अनेक कछुआ कबूतर (Oriental Turtle Dove) थे जो बिनसर में आये पर्यटकों का आनंदपूर्वक अभिनन्दन कर रहे थे।

कुमाऊँ में पक्षी दर्शन के लिए कुछ आवश्यक सूचनाएं

इस संस्करण में अब तक जो मैंने प्रस्तुत किया है, वह हिमशैल का केवल शीर्ष है। देवालय शिखर का कलश मात्र है। उत्तराखंड में अनेक असाधारण हिमालयी पक्षियों का वास है जो केवल इसी क्षेत्र में पाए जाते हैं।

  • उत्तराखंड एक पर्वतीय क्षेत्र है जहाँ मार्ग अत्यंत जोखिम भरे तथा संकरे होते हैं। पक्षियों के अवलोकन तथा चित्रांकन हेतु अपने वाहनों को इन संकरे मार्गों पर जहाँ चाहें वहाँ खड़ा ना करें।
  • पक्षी दर्शन का सर्वोत्तम साधन है, पदभ्रमण। प्रातः, अरुणोदय काल में, अर्थात सूर्योदय से कुछ पूर्व ही नगरी वातावरण से दूर जाकर प्राकृतिक परिवेश में पदभ्रमण प्रारंभ करें। आप विविध पक्षियों के दर्शन उनके प्राकृतिक परिवेश में कर सकते हैं।
  • पक्षी दर्शन एक गहन उपक्रम है जिसके लिए धैर्य, सूक्ष्म दृष्टि एवं विविध पक्षियों के कलरव को ध्यान पूर्वक सुनने की आवश्यकता होती है।

हमने अपने उत्तराखंड भ्रमण में अनेक पक्षियों के दर्शन किये। किन्तु हमारी यह यात्रा पक्षी दर्शन विशेष नहीं थी। इन पक्षियों के अवलोकन के पश्चात हमारे भीतर यह तीव्र अभिलाषा उत्पन्न हो गयी है कि भारत के इस पर्वतीय राज्य में हम पुनः शीघ्र आयें तथा उत्तराखंड के वैशिष्ट्य पूर्ण पक्षियों के अवलोकन का आनंद उठायें। मेरे पंख-युक्त प्रिय सखाओं, मैं आपसे भेंट करने पुनः शीघ्र आऊंगी! इस संस्करण में पक्षियों के चित्रों की संख्या को सीमित करने के लिए मैंने उनके समुच्चित चित्र प्रकाशित किये हैं।

अनुवाद: मधुमिता ताम्हणे

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नेपाल के मनभावन पक्षी- चितवन राष्ट्रीय उद्यान https://inditales.com/hindi/chitwan-rashtriya-udyan-nepal-ke-pakshi/ https://inditales.com/hindi/chitwan-rashtriya-udyan-nepal-ke-pakshi/#respond Wed, 23 Oct 2024 02:30:24 +0000 https://inditales.com/hindi/?p=3705

मुझे पक्षियों को देखना, उनकी चहचहाहट सुनना सदा से प्रिय था। मेरे जीवन में एक काल ऐसा था जब मैं पक्षियों की विविध प्रजातियों से अनभिज्ञ थी। अपने आसपास के पक्षियों को देखकर प्रसन्न हो जाती थी। जैसे जैसे मैंने विविध नभचरों को जानना एवं पहचानना आरंभ किया, मेरे आनंद में कई गुना वृद्धि हो […]

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मुझे पक्षियों को देखना, उनकी चहचहाहट सुनना सदा से प्रिय था। मेरे जीवन में एक काल ऐसा था जब मैं पक्षियों की विविध प्रजातियों से अनभिज्ञ थी। अपने आसपास के पक्षियों को देखकर प्रसन्न हो जाती थी। जैसे जैसे मैंने विविध नभचरों को जानना एवं पहचानना आरंभ किया, मेरे आनंद में कई गुना वृद्धि हो गयी। वनीय प्रदेशों में जाकर उन्हे ढूँढना, उनकी विविध चंचल चालों का आनंद उठाना, उनकी छवियों को अपने कैमरा में उतारना, मुझे लुभाने लगा है। वनीय क्षेत्रों की मेरी गत कुछ यात्राओं में मैंने अपने खग मित्रों के विषय में बहुत कुछ सीखा। वनों में पदभ्रमण करते हुए मैंने इन लुभावने प्राणियों के दुर्लभ दर्शन किये, कुछ दुर्लभ छायाचित्र लिए।

चितवन राष्ट्रीय उद्यान के पक्षी
चितवन राष्ट्रीय उद्यान के पक्षी

नेपाल के चितवन राष्ट्रीय उद्यान में भी मैंने इन पक्षियों के दर्शन करने के उद्देश्य से पदभ्रमण किया था। वहाँ मैंने विविध मनमोहक पक्षियों के दर्शन किए। अनेक पक्षियों ने मुझे उनके चित्र लेने के अवसर भी प्रदान किए जो सहसा दुर्लभ होते हैं। आईये, उन्ही चित्रों के माध्यम से, नेपाल के चितवन राष्ट्रीय उद्यान के इन चंचल प्राणियों से आपकी भेंट कराती हूँ।

चितवन राष्ट्रीय उद्यान के लुभावने पक्षी

नेपाल के तराई क्षेत्र में स्थित चितवन राष्ट्रीय उद्यान के भ्रमण के लिए मैं वहाँ के बरही वन विश्राम गृह (Barahi Jungle Lodge) में ठहरी थी। मेरा पक्षी दर्शन वहीं से आरंभ हो गया था। हमने विश्राम गृह में हमारे कक्ष के बाहर अनेक सुंदर पक्षियों को विचरण करते देखा जिन्होंने हमारी यात्रा की सम्पूर्ण थकान मिटा दी थी। राप्ती नदी के तट पर सुस्ताते मगरमच्छों एवं घड़ियालों के मध्य विविध पक्षी यत्र-तत्र फुदक रहे थे। अपनी नौका सफारी में भी हमने अनेक पक्षी देखे। उनमें से अनेक पक्षी गेंडों की पीठ पर बैठे भ्रमण का आनंद ले रहे थे। हाथी की सवारी के लिए जाते हुए भी हमने कई पक्षियों के दर्शन किए। वन में पदभ्रमण करते हुए हमें उनके सर्वोत्तम दर्शन उपलब्ध हुए।

चहचहाते पक्षी

जब हम चितवन पहुँचे, संध्या हो चुकी थी। अतः हमारे इन नभचर मित्रों से हमारी प्रथम भेंट प्रातः ही हो सकी। वो हमारे लिए अद्वितीय क्षण थे जब पक्षियों की चहचहाहट से हमारी प्रातःकाल आरंभ हुई। पक्षियों के कलरव ने हमें प्रातः शीघ्र ही उठा दिया था। बरही विश्राम गृह के निकट स्थित नदी सघन कोहरे से ढँकी हुई थी। जब हम हाथी की पीठ पर चढ़कर भ्रमण करने निकले, कोहरा शनैः शनैः छँटने लगा था। नदी के तट पर विचरण करते राजबक अथवा सारस जैसे बड़े पक्षी दृष्टिगोचर होने लगे थे। किन्तु हमारे कान अनेक पक्षियों की चहचहाहट से गूंज रहे थे जो अब भी हमारी आँखों से ओझल थे।

बुलबुल
बुलबुल

जिस पक्षी के हमने सर्वप्रथम स्पष्ट दर्शन किए, वह था, सेमल के वृक्ष के ऊपर बैठा घोंघिल अथवा Asian openbill Stork जिसे एशियाई चोंचखुला भी कहते हैं। सेमल का यह वृक्ष नारंगी पुष्पों से भरा हुआ था। उस पर एक भी पत्ती नहीं थी। वृक्ष की एक सूखी शाखा पर बैठे इस पक्षी ने मेरे कॅमेरे को प्रसन्न कर दिया था। बिना किसी अवधान के उसने इस पक्षी के अनेक चित्र लिए।

हमने कुछ सारसों को राप्ती नदी के तट पर भी कलोल करते देखा।

प्रातः जलपान के पश्चात हमने राप्ती नदी पार की। जीप पर सवार होकर चितवन राष्ट्रीय उद्यान में जीप सफारी के लिए चल दिए। मार्ग में हमने सर्वप्रथम जंगल मैना तथा बुलबुल जैसे कुछ सामान्य पक्षी देखे।

रिऊ नदी के तट

मार्ग में हम रिऊ नदी के तट पर पहुँचे। यह एक संकरी नदी है। इसके चट्टानी तल पर एक छोटा सा पक्षी टहल रहा था। हमने उससे भी भेंट की।

सेमल के पेड़ पर पक्षी
https://www.inditales.com/wp-content/uploads/2017/05/chitwan-bird-asian-openbill-stork.jpg

कुछ काल पश्चात हमें एनहिंगा अथवा Darter पक्षी दृष्टिगोचर हुआ। ये मछलियाँ खाते हैं। लंबी ग्रीवा के कारण इसे Snake Bird भी कहते हैं।

संध्या होते होते सभी लजीले पक्षियों ने वृक्ष की सूखी शाखाओं पर प्रकट होना आरंभ कर दिया। हमें अनेक पक्षियों के दर्शन हुए, जैसे:

मधुया (Grey-headed Fish Eagle)

पुंडरीकाक्ष अथवा White-eyed Buzzard

शिकरा पक्षी

हमने लाल छाती का एक टुइयाँ तोता (Red-breasted Parakeet) देखा जो सेमल के नारंगी पुष्प के साथ खेल रहा था।

जंगली मैना
जंगली मैना

सम्पूर्ण मार्ग में हमने अनेक मोर देखे। कुछ ठाठ से वृक्षों की शाखाओं पर विराजमान थे तो कुछ धरती पर विचरण कर रहे थे। वहीं कुछ मोर अपने मनमोहक नृत्य से मोरनियों को मोह रहे थे।

ऊँचे हाथी घास पर स्वयं को संभालता श्वेत पूंछ का एक गोजा देखा जिसे White-tailed Stonechat भी कहते हैं।

पदभ्रमण सफारी

दूसरे दिवस हम पदभ्रमण करते हुए वन की सफारी करने निकले। हमने एक नीलकंठ को देखा जो नदी के जल के ऊपर लटकती एक शाखा पर बैठकर, नीचे जल के भीतर तैरती मछलियों को पकड़ने की तैयारी कर रहा था।

लाल बुलबुल
लाल बुलबुल

वन में यूँ तो अनेक पक्षी दृष्टिगोचर होते हैं लेकिन कॅमेरे में उनके चित्र ले पाना लगभग असंभव होता है। पक्षियों के छायाचित्र लेने के लिए मार्ग के दोनों ओर के वृक्ष सर्वोत्तम स्थल होते हैं। इसके अतिरिक्त, मैदानी क्षेत्रों में स्थित वृक्षों की सूखी शाखाएं भी चित्रीकरण के लिए उत्तम स्थल होते हैं।

हमें एक वृक्ष के तने पर बैठा धूसर नीले रंग का एक सुंदर पक्षी दिखा जिसकी चोंच नारंगी रंग की थी। मैं अपने कॅमेरे से उसका एक छायाचित्र ही ले पायी थी कि वह वन में कहीं लुप्त हो गया। वही चित्र अब मेरे लिए अमूल्य हो गया है।

अकस्मात ही, ना जाने कहाँ से, एक स्वर्गपक्षी हमारे समक्ष प्रकट हो गया तथा हम उसकी ओर अपने कॅमेरे घुमाएं, उससे पूर्व ही वह अकस्मात कहीं लुप्त भी हो गया।

संध्याकालीन नौका सफारी

संध्याकालीन नौका सफारी में अंततः हमें बतखों (Rhodesian Ducks) को देखने का सुअवसर प्राप्त हो ही गया। जब से हम चितवन राष्ट्रीय उद्यान आए थे, इनका किटकिटाना अनवरत सुन रहे थे किन्तु उन्हे अब तक देख नहीं पाये थे। ये प्रवासी नभचर हैं जो प्रत्येक वर्ष हिमालयीन क्षेत्रों से यहाँ आते हैं।

तोता
तोता

अन्य प्रजातियों की बतखें भी ऊँचे स्वर में किटकिटाते हुए यहाँ-वहाँ विचरण कर रही थीं। उन्हे देख मुझे एक कहावत का स्मरण हुआ, मछली बाजार। मुझे साधित हुआ कि नदी ही तो उनका मछली बाजार है। कुछ क्षणों पश्चात मैंने कुछ स्थानीय नेपालियों को देखा जो छोटे छोटे जालों में मछलियों को पकड़ने का प्रयास कर रहे थे।

चितवन राष्ट्रीय उद्यान के बहुरंगी पक्षी

मैंने बरही वन विश्राम गृह के समीप ही अनेक बहुरंगी पक्षियों को देखा। जैसे:

मोरनी
मोरनी

पीले रंग की एक छोटी सी पक्षी, जिसकी पीठ पर धारियाँ थीं। वह सोबिगा पक्षी था जिसे अंग्रेजी में Common Lora कहते हैं। एक वृक्ष पर कुछ क्षण शांत बैठकर उसने मुझे उसका सुंदर छायाचित्र लेने का पूर्ण अवसर प्रदान किया।

हरे हरे पत्तों के मध्य बैठा एक हरे रंग का पक्षी मुझे इतना भ्रमित कर गया कि मैं उसका छायाचित्र लगभग मिटाने ही वाली थी, यह सोचकर कि यहाँ कोई पक्षी नहीं है। समय रहते मुझे आभास हो गया कि यह तो वृक्ष की एक शाखा में आनंद से बैठा बसंत (Lineated Barbet) है।

हमें एक छोटा सा गोलाकार पक्षी दिखाई दिया जिसे गवैया अथवा फुदकी (warbler) कहते हैं। उसकी क्रीड़ाओं को देख आपको यह आभास हो जाएगा कि ‘फुदकना’, यह शब्द कहाँ से आया होगा!

चितवन राष्ट्रीय उद्यान अवलोकन के अंतिम चरण में हम अपना भ्रमण समाप्त करने ही वाले थे कि हमारे समक्ष कुछ गिद्ध प्रकट हो गए। मानो हमें यह आभास करा रहे हों कि यहाँ हम भी हैं! सही भी था! इन ३-४ दिवसों में हमने उन्हे देखा ही नहीं था!

इस भ्रमण में अंतिम दर्शन हुए, राप्ती नदी के ऊपर उड़ते बगुलों के।

वनाग्नि एवं चितवन राष्ट्रीय उद्यान के पक्षी

हमने जब जब भी वन्य जीवन दर्शन के लिए यात्राएँ  की हैं, इन नभचरों से भेंट अवश्य हुई है। किन्तु यह यात्रा विशेष है क्योंकि हमें इन खगों के विचित्र हावभावों को देखने का सौभाग्य मिला। वन के एक भाग में ऊँचे हाथी घास को जलाया जा रहा था ताकि उनके स्थान पर नवीन कोंपलें जन्म लें जो गेंडों का प्रिय भोजन है।

सारस पक्षी
सारस पक्षी

उस अग्नि के चारों ओर बुलबुल एवं ड्रोन्गो जैसे अनेक छोटे पक्षी एकत्र हो रहे थे. वहाँ उनके लिए भोजन स्थल जो बन गया था। अग्नि की उष्णता से बचने के लिए सभी कीड़े-मकोड़े भूमि से बाहर आ रहे थे तथा इन पक्षियों का भोजन बन रहे थे।

विशेष दृश्य था। जिन्होंने वनाग्नि देखी है, उनके लिए भले ही यह एक सामान्य घटना होगी किन्तु मेरे लिए वह एक विशेष घटना थी। इससे पूर्व मैंने ऐसा अद्वितीय दृश्य नहीं देखा था। ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे भूल से पक्षी अग्नि के भीतर आकर्षित हो रहे हों। किन्तु सभी पक्षी एक साथ एक ही भूल कैसे कर सकते हैं? हमारे लिए यह एक अनोखा क्षण था जब हमें इतने सारे पक्षियों को एक साथ देखने का सुअवसर प्राप्त हुआ।

चितवन में पक्षी दर्शन

चितवन में हम जहाँ भी गए, हमें विविध पक्षियों के दर्शन हुए। यहाँ तक कि बरही वन विश्राम गृह, जहाँ हम ठहरे थे, वहाँ के परिसर में भी हमें अनेक सुंदर पक्षियों के दर्शन हुए। एक के पश्चात एक पक्षी हमें ऐसे दर्शन दे रहा था मानो हमें स्मरण कर रहा था कि मुझे विस्मृत नहीं करना!

मैं उन्हे कभी नहीं भूल सकती!

मैंने अपने जीवन में अनेक पक्षी दर्शन यात्राएँ की हैं। उनमें से कुछ के संस्करण आपके लिए प्रस्तुत कर रही हूँ। वे इस प्रकार हैं:

नवाबगंज पक्षी अभयारण्य- लखनऊ कानपुर महामार्ग पर

ओडिशा की मंगलाजोड़ी आद्रभूमि: जलपक्षियों के स्वर्ग में नौकाविहार

Birds of Pench National Park, Madhya Pradesh

Bird Photography at Satpura National Park

Bharatpur Bird Sanctuary

Wooly-necked Stork

अनुवाद: मधुमिता ताम्हणे

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नवाबगंज पक्षी अभयारण्य- लखनऊ कानपुर महामार्ग पर https://inditales.com/hindi/nawabganj-pakshi-vihar-lucknow-kanpur/ https://inditales.com/hindi/nawabganj-pakshi-vihar-lucknow-kanpur/#comments Wed, 23 Feb 2022 02:30:00 +0000 https://inditales.com/hindi/?p=2599

मैं जब लखनऊ से बिठूर तक की यात्रा का नियोजन कर रही थी, मेरी दृष्टी गूगल मानचित्र पर दर्शाए गए नवाबगंज पक्षी अभयारण्य पर पड़ी। मैंने मानचित्र का विस्तार कर उसे सूक्ष्मता से निहारा। मुझे वहां एक विशाल जलाशय दृष्टिगोचर हुआ। मैंने अनुमान लगाया कि इतने विशाल जलाशय में विभिन्न प्रजातियों के अनेक पक्षी होंगे। […]

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मैं जब लखनऊ से बिठूर तक की यात्रा का नियोजन कर रही थी, मेरी दृष्टी गूगल मानचित्र पर दर्शाए गए नवाबगंज पक्षी अभयारण्य पर पड़ी। मैंने मानचित्र का विस्तार कर उसे सूक्ष्मता से निहारा। मुझे वहां एक विशाल जलाशय दृष्टिगोचर हुआ। मैंने अनुमान लगाया कि इतने विशाल जलाशय में विभिन्न प्रजातियों के अनेक पक्षी होंगे। मैंने निश्चय किया कि बिठूर से वापिस आते समय यदि समय उपलब्ध हो तो मैं वहां अवश्य जाउंगी।

नवाबगंज पक्षी अभ्यारण्य की आर्द्र भूमि
नवाबगंज पक्षी अभ्यारण्य की आर्द्र भूमि

कालांतर में मुझे अपने इस निश्चय पर अत्यंत संतुष्टि हुई। मुझे प्रसन्नता है कि हम उस पक्षी अभयारण्य में गये। थके हुए होने के पश्चात भी हमने अभयारण्य के भीतर लगभग ४ से ५ किलोमीटर की पदयात्रा की थी। उस पदयात्रा ने हमारी सम्पूर्ण थकान मिटा दी थी। वह पदयात्रा अत्यंत स्फूर्तिदायक व आनंदित करने वाली यात्रा थी। रविवार का दिन होने के पश्चात भी वहां गिने-चुने पर्यटक ही थे। टिकट खिड़की पर हमें पर्यटकों के कुछ समूह अवश्य मिले किन्तु वे आधा किलोमीटर भी नहीं चल पाए तथा वापिस चले गए थे।

लखनऊ से नवाबगंज पक्षी अभयारण्य – उत्तम एक-दिवसीय भ्रमण

यह पक्षी अभयारण्य वास्तव में एक विस्तृत आर्द्रभूमि है जिसके भीतर से छोटे छोटे अनेक टापू झांकते रहते हैं। वन विभाग ने इस जलाशय के चारों ओर पैदल चलने के लिए पथमार्ग विकसित किया है। इसके अतिरिक्त उन्होंने ऐसी पगडंडियाँ बनाई हैं जिनकी सहायता से आप जलाशय के भीतर जा सकते हैं तथा चारों ओर बैठे पक्षियों को निहार सकते हैं। यदि आप मुझसे पूछें कि यहाँ की सर्वोत्तम स्मृति क्या है, तो वह है, जलाशय के दोनों छोरों को जोड़ती इस संकरी पगडंडी पर चलते हुए चारों ओर विस्तृत नीले जल एवं सूर्य की आभा का आनंद उठाते सैकड़ों पक्षियों को निहारना! वह स्मृति मेरे मस्तिष्क में सदा के लिए छप गयी है।

शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पक्षी विहार
शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पक्षी विहार

यदि आप कुछ क्षण यहाँ शांति से बैठेंगे तो आप चारों ओर पक्षियों के समूह देखेंगे जिनमें कुछ जलाशय के जल में अठखेलियाँ करते हैं, स्नान करते हैं, कुछ आकाश में विचरण करते हैं तो कुछ यहाँ-वहां फुदकते रहते हैं। मानो यह उनका विशाल खेल का मैदान हो। जिन्हें पक्षी, विशेषतः नीले आकाश में उड़ते पक्षियों के छायाचित्र लेने में रूचि हो, तो उन्हें यहाँ अत्यंत आनंद आएगा

पक्षी छायाचित्रीकरण

मैंने निजी कार्यवश लखनऊ का एक लघु भ्रमण नियोजित किया था। इसलिए मैं अपने साथ कैमरा नहीं ले गयी थी। अतः मुझे सभी छायाचित्रीकरण अपने मोबाइल पर करना पड़ा था पक्षियों के छायाचित्रीकरण के लिए एक अच्छे कैमरे की आवश्यकता होती है जिसमें जूमलेंस अवश्य हो। अतः अपना कैमरा साथ रखना ना भूलें। पक्षियों को निहारने का सर्वोत्तम समय सूर्योदय तथा सूर्यास्त से लगभग ९० मिनट पूर्व का होता है जब आपको अनेक पक्षी दृष्टिगोचर होते हैं। आप उन्हें समीप से देख सकते हैं तथा विभिन्न क्रियाकलापों में व्यस्त उनके अनेक अनोखे चित्र ले सकते हैं। सूर्योदय के पश्चात पक्षी सामान्यतः झाड़ियों के भीतर चले जाते हैं। पर्यटन कालावधि में यह अभयारण्य आप जैसे पक्षी प्रेमी को कदापि निराश नहीं करेगी।

अवश्य पढ़ें: ओडिशा की मंगलजोड़ी आद्रभूमि: जलपक्षियों के स्वर्ग में नौकाविहार

यहाँ के विस्तृत पक्षी समूहों में कुछ प्रमुख पक्षी हैं:

  • सींखपर (Northern Pintail)
  • मजीठा की अनेक प्रजातियाँ (Pochards)
  • अंधा बगुला (Pond Herons), जामुनी बगुला (Purple Heron) तथा कबूद/अंजन अथवा धूसर बगुला (Grey Heron)
  • कालिम (Purple Moorhen)
  • गुगराल (Spot-billed Duck)
  • टिटहरी (Lapwings)
  • मुर्गाबी (Teals) जैसे, छोटी मुर्गाबी (Lesser Whistling Teal) तथा चिट्टा (Garganey Teal)
  • सुर्खिया बगुला (Cattle Egrets) तथा पीली चोंच वाला लघु श्वेत बगुला (Intermediate Egrets)
  • आरी (Common Coot)
  • पीपी (Bronze-winged Jacana)
  • गुगला (Asian Openbill Stork)
  • सारस (Sarus Crane)
  • कचाटोर (Black-headed Ibis)
  • लोहा सारंग (Black-necked Stork)
  • राजहंस (Bar-headed Goose)
  • पनडुब्बी (Darter)
  • लुप्तप्राय प्रजातियाँ जैसे, राज गिद्ध (Egyptian vulture) तथा मच्छमंगा (Pallas’s fish eagle)

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सन् १९८४ में स्थापित नवाबगंज पक्षी अभयारण्य कुल २२४ हेक्टेयर में फैला हुआ है। सन् २०१५ में इसका नामकरण ‘शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार’ कर दिया गया है। किन्तु अब भी इसे लोग नवाबगंज पक्षी अभयारण्य के नाम से जानते हैं। यह लखनऊ-कानपूर महामार्ग पर स्थित है तथा उन्नाव जिले के अंतर्गत आता है। सितम्बर २०१९ में इस अभयारण्य को ‘अंतर्राष्ट्रीय रूप से महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि’ का नामांकन प्राप्त हुआ है।

पानी के मध्य में द्वीप  - नवाबगंज पक्षी अभयारण्य
पानी के मध्य में द्वीप

इस अभयारण्य में उत्तर दिशा से प्रवासी पक्षियों की २५० से भी अधिक प्रजातियाँ आती हैं।

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उद्यानपथ या पगडंडियाँ

इस अभयारण्य के भीतर बनाए गए उद्यान पथ मुझे किसी भी अन्य अभयारण्य के उद्यान पथों से उत्तम प्रतीत हुए। अनेक स्थानों पर पर्यवेक्षण मचान बनाए हुए हैं। चूँकि मैं वहाँ दिन के समय गयी थी, वह भी बिना कैमरे के, इसलिए मैं उन मचानों पर नहीं चढ़ी।

नवाबगंज की पगडंडियाँ
नवाबगंज पक्षी अभयारण्य की पगडंडियाँ

जलाशय के तट पर, एक ओर मैंने कई नौकाएं देखीं जो अपने जीवन की अंतिम साँसे ले रही थीं। अतः मैंने सूचना खिड़की पर नौका विहार के विषय में जानने का प्रयत्न किया। उन्होंने मुझे बताया कि वहां पर्यटकों के लिए नौका विहार की सुविधाएं नहीं हैं। मैंने अनुमान लगाया कि कदाचित उन नौकाओं का प्रयोग वन विभाग के कर्मचारी अभयारण्य के रखरखाव के लिए करते हैं।

वहां से लौटने के पश्चात मैं उस अभयारण्य के विषय में अधिक जानकारी के लिए कुछ साहित्य पढ़ रही थी। तब मुझे ज्ञात हुआ कि इस अभयारण्य में सरिसर्पों एवं सर्पों की भी अनेक प्रजातियाँ पायी जाती हैं। भला ही हुआ कि इसकी मुझे पूर्व जानकारी नहीं थी। ‘अज्ञानता में आनंद है’ यह कहावत मेरे लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई। अन्यथा, मैं अभयारण्य के वनीय वातावरण में जिस स्वच्छंदता से विचरण कर रही थी, उसमें अवश्य बाधा उत्पन्न हो जाती।

जलक्रीडा करते वृक्ष - नवाबगंज पक्षी अभयारण्य
जलक्रीडा करते वृक्ष

चारों ओर जल से घिरे वृक्ष तथा उन वृक्षों पर लदे पुष्प सम्पूर्ण परिदृश्य को अत्यंत मनमोहक बना रहे थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पौराणिक ग्रंथों में दर्शाए गए असंख्य रूपों व रंगों से ओतप्रोत प्राकृतिक दृश्य सजीव हो उठे हों। मानवी उपस्थिति लगभग नाममात्र थी जिसके कारण प्राकृतिक दृश्यों की अछूती सुन्दरता द्विगुणीत हो गयी थी। प्रवेश द्वार के समीप बैठने की व्यवस्था है जहां शांति से बैठकर आप पक्षियों का अवलोकन कर सकते हैं तथा प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद उठा सकते हैं।

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विश्रामगृह

यहाँ पर्यटन विभाग द्वारा संचालित एक विश्रामगृह है जहां आप रात्रि में ठहर सकते हैं। यहाँ ठहरने का लाभ यह है कि आप प्रातः शीघ्र ही पक्षी दर्शन के लिए अभयारण्य पहुँच सकते हैं। साथ ही आपको प्रकृति के सानिध्य में समय व्यतीत करने का अवसर प्राप्त होगा। इस विश्रामगृह में भोजनालय की भी सुविधा है। वन विभाग का भी एक विश्रामगृह है जहां ठहरने की अनुमति आपको वन विभाग से प्राप्त करनी पड़ेगी।

हरियाली के मध्य जल में झलकता अम्बर
हरियाली के मध्य जल में झलकता अम्बर

अभयारण्य में उपलब्ध विवरणिका में मैंने पढ़ा कि इसी स्थान पर लक्ष्मण ने कुछ क्षण विश्राम किया था जब वे सीता को बिठूर छोड़कर वापिस अयोध्या आ रहे थे।

इस अभयारण्य में विचरण करने के लिए सायकल पथ भी है। एक हिरण विहार भी है जो मैं नहीं देख पायी। प्रवेश द्वार के निकट एक बालोद्यान है।

कुल मिलाकर इस अभयारण्य दर्शन का अर्थ है, अद्भुत प्रकृति के सानिध्य में एक आनंदमय एवं शांतिपूर्ण दिवस व्यतीत करना। भीड़भाड़ भरे नगरों में रहते हुए व्यस्तता से ग्रसित हम सबको ऐसे स्थलों का दर्शन अनिवार्य रूप से करना चाहिए ताकि हम स्वयं को विश्राम दे सकें, पुनः उर्जावान अनुभव कर सकें तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशील हो सकें।

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नवाबगंज पक्षी अभयारण्य यात्रा सुझाव

  • लखनऊ अथवा कानपुर में ठहरते हुए आप आसानी से एक दिवसीय यात्रा के रूप में इस अभयारण्य का अवलोकन कर सकते हैं।
  • इस अभयारण्य के भीतर पदयात्रा करनी पड़ती है। अतः पैरों में सुविधाजनक जूते पहनें।
  • यहाँ आने का सर्वोत्तम समय शीत ऋतु है। नवम्बर से फरवरी के मध्य दूर-सुदूर से यहाँ अनेक प्रवासी पक्षी आते हैं।
  • अभयारण्य के बाहर भोजन तथा जलपान की सुविधाएं हैं किन्तु अभयारण्य के भीतर ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। अभयारण्य के भीतर स्वयं का भोजन ले जाने की भी अनुमति नहीं है। अतः, अभयारण्य के भीतर प्रवेश करने से पूर्व जलपान अथवा हल्का भोजन ग्रहण कर लें।
  • संभव हो तो दूरबीन अवश्य साथ रखें।
  • टिकट खिड़की पर पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य है। अतः, अपना कोई प्रमाणिक पहचान पत्र साथ रखें।
  • अभयारण्य का प्रवेश शुल्क नाममात्र है किन्तु कैमरा शुल्क अधिक है। मोबाइल के लिए कोई बंधन नहीं है।
  • यदि चाहे तो आप सायकल द्वारा भी अभयारण्य का भ्रमण कर सकते हैं।

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अनुवाद: मधुमिता ताम्हणे

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ओडिशा की मंगलाजोड़ी आद्रभूमि: जलपक्षियों के स्वर्ग में नौकाविहार https://inditales.com/hindi/mangalajodi-pakshi-vihar-odisha/ https://inditales.com/hindi/mangalajodi-pakshi-vihar-odisha/#comments Wed, 15 Dec 2021 02:30:27 +0000 https://inditales.com/hindi/?p=2503

ओडिशा का मंगलाजोड़ी, पर्यावरण एवं पक्षी प्रेमियों का अत्यंत प्रिय गंतव्य है। भारत ही नहीं, अपितु एशिया की विशालतम खारे जल के सरोवर, चिलिका अथवा चिल्का सरोवर के उत्तरी छोर पर स्थित एक गाँव है, मंगलाजोड़ी। सरोवर की उथली दलदली आर्द्रभूमि सहस्त्रों जलपक्षियों का स्वर्ग है। इनमें स्थानीय एवं प्रवासी दोनों प्रजातियों के पक्षी सम्मिलित […]

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ओडिशा का मंगलाजोड़ी, पर्यावरण एवं पक्षी प्रेमियों का अत्यंत प्रिय गंतव्य है। भारत ही नहीं, अपितु एशिया की विशालतम खारे जल के सरोवर, चिलिका अथवा चिल्का सरोवर के उत्तरी छोर पर स्थित एक गाँव है, मंगलाजोड़ी। सरोवर की उथली दलदली आर्द्रभूमि सहस्त्रों जलपक्षियों का स्वर्ग है। इनमें स्थानीय एवं प्रवासी दोनों प्रजातियों के पक्षी सम्मिलित हैं। इनका अवलोकन करने के लिए आप सरोवर में सुनियोजित नौका विहार कर सकते हैं। इस प्रकार आप इन पक्षियों को समीप से देख सकते हैं तथा इस क्षेत्र के पक्षियों की प्रजातियों की विविधता को समझ सकते हैं।

मंगलाजोड़ी का परिदृश्य - नौका के साथ
मंगलाजोड़ी का परिदृश्य – नौका के साथ

मेरे दस-दिवसीय ओडिशा यात्रा के समय, भितरकनिका भ्रमण के पश्चात हम पुरी से मंगलाजोड़ी की ओर निकले। हरे-भरे मनमोहक परिक्षेत्र का आनंद उठाते हुए हम राष्ट्रीय राजमार्ग १६ पहुंचे जो भुवनेश्वर एवं विशाखापत्तनम को जोड़ती है। एक लघु चाय अवकाश के उपरांत हम राष्ट्रीय राजमार्ग पर आगे बढ़े। लगभग २० मिनट के पश्चात हम राजमार्ग स्थित चाँदपुर नगर पहुंचे। तत्पश्चात गाँव के अंतरंग मार्गों पर लगभग ८ किलोमीटर आगे जाकर हम नौका तट पर पहुंचे। जब आप यहाँ आ रहे हों तब यहाँ तक पहुँचने के लिए आवश्यकतानुसार स्थानिकों से दिशा निर्देश अवश्य ले लें।

घुन्घिल
घुन्घिल

पुरी से यह स्थान लगभग ७५ किलोमीटर दूर है जिसका मार्ग बहुधा परिक्षेत्रीय ग्रामीण क्षेत्रों से होकर जाता है। वहीं, भुवनेश्वर से यह स्थान लगभग ७० किलोमीटर दूर है जिसे आप राष्ट्रीय राजमार्ग क्र.१६ द्वारा तय करते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग द्वारा समय की बचत अवश्य होती है किन्तु आप हरियाली व सरोवरों से भरे परिक्षेत्र के नयनाभिराम दृश्यों से वंचित रह जाएंगे। मैं सदैव परिक्षेत्रीय मार्ग का ही सुझाव दूँगी।

कचाटोर
कचाटोर

मंगलाजोड़ी आर्द्रभूमि के जलपक्षी

अपने नयनाभिराम भ्रमण का आरंभ आप इस शांत गाँव के खारे जल की उथली दलदली आर्द्रभूमि के अवलोकन से करें जहाँ असंख्य पक्षियों का वास है।

उड़ान में धूसर बगुला
उड़ान में धूसर बगुला

सरोवर के तट पर लकड़ी की संकरी लंबी नौकाओं की लंबी पंक्ति थी। प्रत्येक नौका पर धूप से बचने के लिए छत्र था। नौकाओं को पक्षियों के ही नाम प्रदान किये गए थे। मुख पर प्रसन्न मुद्रा लिए अनेक वर्दीधारी नाविक तथा पर्यटन परिदर्शक, तट की ओर आते पर्यटकों का स्वागत कर रहे थे। ना कोई मोल-तोल , ना ही कोई भाव-ताव। भ्रमण सूची के अनुसार मानक शुल्क प्रदान कर हम शांति से नौका की ओर बढ़े।

कांस्य पंख लिए पीहू
कांस्य पंख लिए पीहू

मंगलाजोड़ी आर्द्रभूमि जलपक्षियों के लिए स्वर्ग सदृश है। ये ऐसे पक्षी हैं जो मीठे अथवा खारे जल के भीतर अथवा चारों ओर अपना वास ढूंढते हैं। इन पक्षियों में आर्द्रभूमि में विचरण करने के लिए कुछ अनुकूल अंग होते हैं, जैसे झिल्ली युक्त पंजे, बड़ी चोंच तथा लंबी टांगें। उनका मुख्य भोजन है, मछली, कृमि, कीट, जलसर्प तथा वे सभी जो इस आर्द्रभूमि में पनपते हैं। उन्हे यहाँ अपना प्रिय शिकार प्राकृतिक रूप से आसानी से प्राप्त हो जाता है इसीलिए वे इस आर्द्रभूमि में फलते-फूलते हैं तथा इसे अपना वास बनाते हैं।

नौका विहार का सर्वोत्तम समय

मंगलाजोड़ी में नौका विहार
मंगलाजोड़ी में नौका विहार

जलपक्षियों की अनेक प्रजातियों को आप यहाँ देख सकते हैं। किन्तु इसके लिए सर्वोत्तम समय का चुनाव एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। आप में से जो भी पक्षी दर्शन में रुचि रखते हैं वे भलीभाँति जानते हैं कि पक्षियों के अवलोकन करने एवं उनके छायाचित्र लेने का सर्वोत्तन समय प्रातः सूर्योदय अथवा सूर्यास्त से लगभग एक घंटे पूर्व का होता है। किन्तु हम पुरी से सड़क मार्ग द्वारा यहाँ पहुँच रहे थे। इसके अतिरिक्त, मार्ग में हम हरियाली एवं झीलों से भरे परिक्षेत्र के नयनाभिराम दृश्यों का भी आनंद ले रहे थे। मार्ग में चाय अवकाश ने भी हमारा कुछ समय छीन लिया था। अतः यहाँ पहुंचते पहुंचते दोपहर होने लगी थी।

चमकता हुआ बुज्जा
चमकता हुआ बुज्जा

तदनुसार, हम मंगलाजोड़ी आर्द्रभूमि में केवल कुछ घंटों के लिए दोपहर की नौका सवारी कर सकते थे। सामान्यतः, नाविक इस आर्द्रभूमि के लगभग २-३ किलोमीटर लंबे एवं १ किलोमीटर चौड़े क्षेत्र में नौका सवारी के लिए ले जाते हैं। आपकी इच्छा के अनुसार पक्षियों के समीप से अवलोकन करने के लिए तथा छायाचित्र लेने के लिए वे सहर्ष छोटे छोटे विमार्ग ले लेते हैं, कभी गति धीमी कर देते हैं अथवा कुछ क्षण रुक भी जाते हैं।

मंगलाजोड़ी के जलपक्षी

गजपांव
गजपांव

समय तथा ऋतु के अनुसार आप यहाँ पक्षियों की अनेक प्रजातियाँ देख पाएंगें। किन्तु कृपया यह ना भूलें कि अंततः कुछ प्रजातियाँ ऐसी होती हैं जिन्हे देख पाना पूर्णतः हमारे सौभाग्य पर निर्भर होता है।

गुगरल बत्तख
गुगरल बत्तख

इस क्षेत्र में सामान्य रूप से दृष्टिगोचर पक्षी इस प्रकार हैं:

  • बगुले :
    • कबूद/अंजन अथवा धूसर बगुला (Grey Heron),
    • जामुनी बगुला (Purple-Heron),
    • अंधा बगुला (Pond-Heron)
  • श्वेत बगुले :
    • पीली चोंच व काली टांगों वाले श्वेत (सुर्खिया) बगुले (Great-Egret),
    • पीली चोंच वाले लघु श्वेत बगुले (Intermediate-Egret),
    • काली चोंच वाले किलचिया बगुले (Little-Egret)
  • रामचिरैय्या (Kingfishers):
    • श्वेतकंठी रामचिरैय्या,
    • सामान्य रामचिरैय्या,
    • चितकबरी रामचिरैय्या
  • बतख :
    • उत्तरी पिनटेल बतख,
    • चकवा/सुरखाब (Ruddy Shelducks),
    • छोटा सिल्ही (Lesser-Whistling Ducks),
    • कॉमन पोचार्ड,
    • गुगरल बतख (Indian Spot-billed Duck)
  • पनकौआ (Cormorants) :
    • सामान्य पनकौआ,
    • भारतीय पनकौआ
  • बुज्जा, सारस के समान पक्षी (Ibis) :
    • चमकीला बुज्जा,
    • कचाटोर (Black-headed Ibis)
  • कांस्य पंखों का जकाना
  • गुंग्ला अथवा घुंगिल (Asian-Open bill Stork), जाँघिल (Painted Stork)
  • गुंफ कुररी (Whiskered-Tern)
  • पीला खंजन अथवा धोबन (Citrine-Wagtails)
  • टिटहरी (Ruff)
  • लाल गलचर्म टिटहरी (Red-wattled Lapwing)
  • अबाबील (Swallows)
  • सारस (Stork)
  • गजपाँव (Black-winged Stilt)
  • पीला बगुला (Yellow Bittern)
श्वेत बगुले
श्वेत बगुले

अन्य पक्षी जिन्हे यहाँ देखा गया था, वे हैं:

  • मलगूझा (Black-tailed Godwit)
  • अंधाबगुला (Little bittern)
  • पनडुब्बी (Little grebe)
  • चाह (Snipes)
  • पीहू (Jacanas)
  • गौरैय्या (Robins)
  • चिरचिरी (Pipits)
  • गवैया (Warblers)
  • मैना (Pied Mynahs)
  • नॉर्दरन शॉवलर
प्लोवर पक्षी
प्लोवर पक्षी

आर्द्रभूमि एवं जलपक्षियों के दर्शन सुलभ कराती लकड़ी की नौकाएं

लकड़ी की सपाट पेंदे की छोटी छोटी नौकाओं को यहाँ डांगा कहते हैं। इस नौका पर चढ़ते ही प्रथम विचार मेरे मस्तिष्क में उभरा, रक्षा-जाकेट नहीं है? शंका व्यक्त करते ही नाविक ने स्मित हास्य के साथ कहा, “२ फुट पानी है मैडम! चिंता ना करें।“ नाविक नौका को खेने के लिए एक लंबे डंडे द्वारा उथले जल के तल को धकेलने लगा। मुझे ये नौकाएं पक्षीदर्शन के लिए अत्यंत उपयुक्त प्रतीत हुईं। वे अत्यंत ध्वनिरहित होती हैं तथा उनके द्वारा प्रकृति एवं जलपक्षियों को किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होता है।

पीट खंजन पक्षी
पीट खंजन पक्षी

प्रत्येक नौका में अधिकतम ४ पर्यटक, एक परिदर्शक तथा स्वयं नाविक, केवल ६ लोग ही सुरक्षित रूप से बैठ सकते हैं। उथले जल में नाविक द्वारा हस्तचालित होने के कारण इनकी गति अत्यंत धीमी होती है। वैसे भी प्रकृति एवं पक्षियों के दर्शन करने के लिए धीमी गति ही उचित है। लकड़ी की छोटी नौका होने के कारण आप सदैव यह स्मरण रखिए कि उत्साह में नौका के भीतर हलचल ना करें। अन्यथा नौका का संतुलन खो सकता है तथा नौका में जल भर सकता है। यदि आपको नौका पर अपने बैठने के स्थान में परिवर्तन करना हो तो नाविक को सूचना दें। वह किसी निकटतम भूमि के समीप जाकर, उसका आधार लेते हुए नौका का संतुलन बनाता है। तभी आप स्थान परिवर्तित कर सकते हैं।

उड़ान में मलगूझा
उड़ान में मलगूझा

यूँ तो आप भुवनेश्वर अथवा पुरी के विश्रामगृह में ठहर कर, एक दिवसीय यात्रा के रूप में मंगलाजोड़ी आकर एक सामान्य नौका सवारी कर सकते हैं। किन्तु, यदि आपको प्राकृतिक दृश्यों एवं विशेषतः पक्षियों में अत्यंत रुचि हो तो आप मंगलाजोड़ी के समीप ही किसी अतिथिगृह में ठहरकर विस्तृत रूप से इनका अवलोकन कर सकते हैं तथा इनका अध्ययन कर सकते हैं।

नाविक को देख कर आपको नौका खेना आसान प्रतीत हो सकता है। किन्तु विश्वास कीजिए इस उथले दलदली आर्द्रभूमि में नौका खेना किसी कुशल व अनुभवी नाविक का ही कार्य है। यहाँ के सभी नाविक अपने कार्य में भलीभाँति प्रशिक्षित हैं तथा उन्हे पारंपरिक रूप से इस कार्य का पर्याप्त अनुभव प्राप्त है।

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मंगलाजोड़ी का रूपांतर

पक्षियों के झुण्ड आकाश को चित्रित करते हुए
पक्षियों के झुण्ड आकाश को चित्रित करते हुए

कुछ दशकों पूर्व यहाँ के गांववासी इन्ही पक्षियों का शिकार करते थे। किन्तु गत कुछ वर्षों से वही गांववासी इन पक्षियों का संरक्षण कर रहे हैं। दशकों पूर्व इन गांववासियों के समक्ष जीविका का कोई साधन नहीं था। कोई लाभप्रद रोजगार के अवसर नहीं थे। असहाय पक्षियों का शिकार करना उनका विकल्प बन गया था। किन्तु प्रकृति-प्रेमियों, पक्षी-प्रेमियों एवं दैनंदिनी व्यवहारों से मुक्ति की आस में आए एक-दिवसीय पर्यटकों ने यहाँ के सम्पूर्ण दृश्य को परिवर्तित कर दिया है। जो हाथ इन पक्षियों का वध करने में पीछे नहीं हटते थे, उन्ही हाथों में अब डॉ. सलीम अली की पुस्तक, ‘Dr. Salim Ali’s handbook of Indian Birds’ रहती है। वही गांववासी अब पर्यटन परिदर्शक बनकर पक्षियों की दर्जनों प्रजातियों से हमारा परिचय कराते हैं। वे दूर से हमें उन पक्षियों से भेंट करवाते हैं, उनका परिचय देते हैं, तथा उनके मूल प्रदेश की जानकारी देते हैं। यहाँ दूर प्रदेशों एवं देशों के भी अनेक प्रवासी पक्षी नियमित रूप से भेंट देते हैं।

जामुनी बगुला
जामुनी बगुला

जब आप परिदर्शक बने इन गांववासियों से इन नभचरों के विषय में चर्चा करेंगे, उनका विस्तृत ज्ञान आपको आश्चर्यचकित कर देगा। अब वे इस अद्भुत क्षेत्र के स्थानीय तथा प्रवासी नभचरों के संरक्षक बन चुके हैं। पर्यटन विभाग द्वारा सम्पूर्ण प्राकृतिक परितंत्र के संरक्षण का यह अत्यंत अनूठा उदाहरण है।

मंगलाजोड़ी में नौका विहार

गुंफ कुररी
गुंफ कुररी

मंगलाजोड़ी तट से कई प्रकार की नौका-विहार सेवाएं उपलब्ध हैं। कुछ सेवाएं सम्पूर्ण दिवस के लिए ली जा सकती हैं जिनमें वे आपको चिल्का सरोवर के गहरे जल में ले जाते हैं। वे नौका में ही भोजन बनाकर परोसते हैं। ये नौकाएं बड़ी होती हैं। आप सम्पूर्ण दिवस नौका में ही बिताते हुए प्रकृति का आनंद उठाया सकते हैं। हमने जो नौका-विहार सेवा ली थी, वह दो घंटों की थी। यह विहार उथले जल में, विशेषतः पक्षी अवलोकन के लिए किया जाता है।

मंगलाजोड़ी आर्द्रभूमि क्षेत्र के पक्षियों के अवलोकन के लिए सर्वोत्तम काल शीत ऋतु में नवंबर मास से लेकर मार्च मास तक है। यहाँ की उथली आर्द्रभूमि एक महत्वपूर्ण वैश्विक आर्द्रभूमि प्राकृतिक वास है तथा एक अंतर्राष्ट्रीय पक्षी संरक्षण क्षेत्र है। यह जलपक्षियों का स्वर्ग है।

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डोंगी

पाश्चात्य देशों में इस प्रकार की नौका को पंट नौका कहते हैं जो एक प्रकार की डोंगी है। इस प्रकार की नौका को खेने के लिए एक लंबी डंडी को उथले जल के तल पर टिका कर भूमि को पीछे धकेला जाता है। इससे नौका आगे बढ़ती है। यहाँ पर प्रयोग में आने वाली डोंगी हल्के वजन की है तथा विशेषतः आमोद-प्रमोद के लिए है। इस प्रकार की डोंगी में नाविक नौका के पृष्ठभागीय छोर पर खड़े होकर नौका खे सकता है। इससे वह अधिक सवारियाँ नौका पर बिठा सकता है।

मंगलाजोड़ी में टिटहरी
मंगलाजोड़ी में टिटहरी

१२ से १८ फुट लंबाई की लकड़ी की इन छोटी नौकाओं में धुरी, पिछली पतवार, पसलियाँ तथा कक्ष नहीं होते। नौकाओं की गहराई भी केवल २ फुट की होती है।

मंगलाजोड़ी गाँव नौका निर्माताओं के लिए भी प्रसिद्ध है। लकड़ी के नौकाओं का निर्माण करने वाले मिस्त्री इसी गाँव के वासी हैं। यह उनका पारंपरिक व्यवसाय है। उन्हे बिंधानी, बढ़ई अथवा बिस्वकर्मा कहते हैं। अब यह व्यवसाय लगभग मृतप्राय हो रहा है। उस पर पिछले कुछ सदियों व दशकों में सिकुड़ती चिल्का सरोवर ने आग पर घी का काम किया है।

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नौकायन तट पर एक हाट है जहाँ आपको चाय, बिस्कुट तथा कुछ नाश्ते मिल जाएंगे। नौकायन अवधि न्यूनतम दो घंटों की है। आप अपनी इच्छानुसार उससे अधिक समयावधि की भी सवारी कर सकते हैं। गाँव में पर्यटकों के लिए सम्पूर्ण भोजन की सुविधा केवल रेसॉर्टस में ही है, वह भी पूर्वसूचना देने के पश्चात ही उपलब्ध की जाती है। अन्यथा आपको ७ से ८ किलोमीटर गाड़ी चलकर निकटतम नगरी में पहुंचना पड़ेगा जहाँ आपको मूलभूत भोजन उपलब्ध हो जाएगा। यदि आप इस गाँव में आश्रय नहीं ले रहे हैं तो तदनुसार अपनी व्यवस्था नियोजित करें।

मंगलाजोड़ी आर्द्रभूमि में नौका विहार का एक विडिओ

मेरे मंगलाजोड़ी भ्रमण के समय मैंने इस क्षेत्र के पक्षियों की यह विडिओ बनाई है जिसे मैंने IndiTales YouTube channel पर प्रेषित की है। ओडिशा के इस प्राकृतिक स्वर्ग में लोकप्रिय जलपक्षियों के अवलोकन की योजना बनाने से पूर्व यह विडिओ अवश्य देखें। इससे आप अपने भ्रमण का पूर्वानुमान लगा सकते हैं।

यात्रा सुझाव

  • नौका सवारी के समय अपना पेयजल अपने साथ रखें। किन्तु रिक्त बोतल प्रकृति में फेंके नहीं। उन्हे अपने साथ वापिस लाकर कूड़ेदान में ही डालें।
  • दूर बैठे पक्षियों को समीप से देखने के लिए दूरबीन सहायक है।
  • पक्षियों के उत्तम छायाचित्र लेने के लिए प्रवर्धक लेंस युक्त DSLR कॅमेरा सर्वोत्तम है। अन्य प्रवर्धक कॅमेरे केंद्रित होने में समय लगाते हैं। इसके अतिरिक्त चलती नौका के कारण भी कॅमेरे को केंद्रित करने में बाधा उत्पन्न होती है।
  • पक्षियों को खाना ना दें।
  • पक्षियों को समीप से देखने के उत्साह में नाविक को ना बताए उठे नहीं, ना ही नौका में अपना स्थान परिवर्तन करें।
  • पक्षियों के अवलोकन का सर्वोत्तम समय प्रातःकाल है। किन्तु प्रातःकाल बहुधा धुंध होती है जिसके कारण वातावरण धूमिल रहता है। वातावरण निर्मल व स्वच्छ होने पर नौकायन तट पहुँचें।
  • गाँव के समीप कुछ रेसॉर्टस हैं जहाँ आप कुछ दिवस ठहर सकते हैं तथा इस आर्द्रभूमि के सौन्दर्य का आनंद उठा सकते हैं।
  • यदि आप एक से अधिक दिवस यहाँ आना चाहते हैं किन्तु गाँव में नहीं ठहरना चाहते, तो आप भुवनेश्वर में ठहरकर प्रत्येक दिवस यहाँ तक गाड़ी द्वारा पहुँच सकते हैं। किन्तु मेरे अनुमान से यह अत्यंत थकावट भरी योजना होगी। विशेषतः जब आप इस प्राकृतिक सौन्दर्य में सराबोर होकर कुछ दिवस शांति से बिताना चाहते हैं।
  • नाविक एवं पर्यटन परिदर्शक, सभी मंगलाजोड़ी गाँव के स्थानिक हैं। वे अत्यंत अनुभावशाली हैं। उन्हे इस क्षेत्र की सूक्ष्मताओं का भलीभाँति ज्ञान है। इसका लाभ अवश्य उठायें।

अनुवाद: मधुमिता ताम्हणे

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