Comments on: सोना रूपा कलाबत्तू – वाराणसी की लोकप्रिय ज़री बुनाई https://inditales.com/hindi/zari-sona-rupa-kalavastra-varanasi/ श्रेष्ठ यात्रा ब्लॉग Thu, 26 Jan 2023 05:20:38 +0000 hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.7 By: Sanjay Jain https://inditales.com/hindi/zari-sona-rupa-kalavastra-varanasi/#comment-974 Thu, 26 Jan 2023 05:20:38 +0000 https://inditales.com/hindi/?p=2890#comment-974 🙏🙏]]> आपका कलाबत्तू या कलावस्त्र पर यह आलेख बहुमुल्य व ज्ञानवर्धक है, जैसे जरी, सोना, चांदी व रुपये जैसे शब्दो की व्युत्पत्ति कहां से हुई, जरी के अनेक प्रकार व निर्माण की प्रक्रिया। यह सुनहरी व रुपहली जरी, सामान्य व रेशमी धागे के साथ आलिंगन कर वस्त्रों में चार चांद लगा देती है। शुद्ध जरी की साड़ियां हमारे भी घर मे मैने देखी है, लेकिन यह सत्तर के दशक की बात है, लेकिन वह पहनने योग्य नही थी तो उन्हें बाजार में जाकर जब बेचते थे तो वह उन्हें हमारे सामने ही जलाकर जो चांदी के तार निकलते थे उनका वजन कर बाजार मूल्य पर हमें वह कीमत प्राप्त होती थी। आपका वीडियो भी शानदार रहा।
साधुवाद, सारगर्भित जानकारी के लिए। 🙏🙏🙏

]]>
By: प्रदीप खोपकर https://inditales.com/hindi/zari-sona-rupa-kalavastra-varanasi/#comment-971 Wed, 11 Jan 2023 10:10:53 +0000 https://inditales.com/hindi/?p=2890#comment-971 अनुराधा जी, वाराणसी की प्रसिद्ध ज़री बुनाई की जानकारी देता सुंदर आलेख। ज़री बुनाई में प्रयुक्त होने वाले चांदी और स्वर्ण धागों को बनाने की प्रक्रिया को वीडियो के माध्यम से बहुत ही सुंदरता से समझाया गया है।
संयोग से हम लोग पिछले पाँच दिनों से वाराणसी में ही थे। इस दौरान वहाँ की प्रसिद्ध बनारसी साड़ियों के थोक विक्रेता से भी ज़री की बुनाई के बारे में जानकारी मिली। आजकल बुनाई मशीनों से की जाने लगी है फिर भी ज़री की बुनाई अधिकांशतः स्थानीय बुनकरों द्वारा ही हाथ से की जाती हैं। वाराणसी की छोटी छोटी गलियों में बुनकरों द्वारा सधे हाथों से बुनाई का काम बड़ी ही सुंदरता से किया जाता है। एक और नई जानकारी प्राप्त हुई,ताने-बाने के लिये आवश्यक ज़री के धागे आजकाल चीन से आयात किए जाते हैं। इसका मुख्य कारण वहाँ के धागों की मोटाई का एक समान होना ! यह जानकारी हमारे लिए कम आश्चर्यजनक नहीं थी।
धन्यवाद।

]]>