गोवर्धन परिक्रमा – वह पर्वत जिसे कृष्ण ने अपनी कनिष्ठिका पे उठाया था
गोवर्धन पर्वत, यमुना एवं ब्रज भूमि – केवल यही तीन मूल धरोहर कृष्ण के समय से अब तक अस्तित्व में हैं। कम से कम...
माधवेश्वर मंदिर परिसर दरभंगा – इस ‘श्मशान’ में होता है जीवन का दर्शन
बागमती नदी के किनारे बसे बिहार के पुराने शहरों में से एक दरभंगा आज बिहार का प्रमंडलीय मुख्यालय है। इस शहर का सर्वप्रथम जिक्र...
महालक्ष्मी मंदिर – कोल्हापुर या करवीरपुर स्थित शक्ति पीठ
कोल्हापुर एवं महालक्ष्मी मंदिर, यह दो शब्द हम प्रायः एक ही श्वास में कह जाते हैं। किसी तीर्थयात्री की दृष्टी से देखें तो दोनों...
कैलाशनाथ मंदिर – कांचीपुरम का प्राचीनतम शिव मंदिर
कैलाशनाथ मंदिर, कांचीपुरम का तीसरा विशालतम मंदिर तथा प्राचीनतम शिव मंदिर। इससे पूर्व मैंने कांचीपुरम के दो सबसे बड़े मंदिरों के दर्शन किये थे,...
फिरोजाबाद – रंगबिरंगी कांच की चूड़ियों की सुहाग नगरी
फिरोजाबाद, इस नगरी के नाम का स्मरण सदैव से मेरे कानों में कांच की चूड़ियों की खनक उत्पन्न करता रहा है। सम्पूर्ण भारत में...
कोपेश्वर मंदिर खिद्रापुर – एक अद्भुत वास्तुकला
महाराष्ट्र में कोल्हापुर के निकट, खिद्रापुर का कोपेश्वर मंदिर चालुक्य देवालय वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति है। कोपेश्वर मंदिर, तंजावुर के चोला मंदिरों अथवा खजुराहो...
कलदी – केरल में आदिगुरूआदि शंकराचार्य की जन्म स्थली
कलदी, इस स्थान के विषय में मुझे सर्वप्रथम जानकारी तब प्राप्त हुई थी जब मैं आदि शंकराचार्यजी की जीवनी पढ़ रही थी। मैंने ढूंडने...
त्रिवेणी संगम की नगरी प्रयागराज के प्राचीन मंदिर
प्रयागराज के प्राचीन मंदिरों के विषय में प्रयागराज नगरी से बाहर कदाचित ही कोई जानता हो। हम प्रयागराज को त्रिवेणी संगम से ही अधिक...
मांडू की प्राचीन जल प्रबंधन प्रणाली एवं बावड़ियाँ
विंध्य पर्वत श्रंखला के एक पहाड़ी क्षेत्र पर, लगभग २००० फीट की ऊंचाई पर विराजमान मांडू एक प्राचीन दर्शनीय धरोहर है। उत्तर में मालवा...
विष्णु कांची का वरदराज पेरूमल मंदिर – कांचीपुरम
जहां एक ओर कांची कामाक्षी मंदिर कांचीपुरम नगरी का केंद्र बिंदु है, वहीं कांचीपुरम के दो और पहलू हैं, शिव कांची तथा विष्णु कांची।...






















