हलेबिडू स्थित होयेसलेश्वर मंदिर

होयसलेश्वर मन्दिर – हैलेबिडु कर्नाटक स्थित अद्भुत होयसल धरोहर

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कर्नाटक के बंगलुरु से लगभग २०० किलोमीटर दूर स्थित एक महत्वपूर्ण मंदिर नगरी है, हैलेबिडु। कला एवं साहित्य के संरक्षक माने जाते होयसल राजवंश की यह राजधानी थी। ‘हैलेबिडु’ का कन्नड़ भाषा में शब्दशः...
एकता की प्रतिमा गुजरात

एकता की प्रतिमा – लौह पुरुष सरदार पटेल को एक श्रद्धांजलि

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नवीन युग की प्रतिमाओं में सर्वोत्तम मानी जानी वाली प्रतिमा निःसन्देह एकता की प्रतिमा अर्थात् स्टैचू ऑफ यूनिटी है। भव्य अधिरचना से युक्त, १८२ मीटर ऊंची यह अद्वितीय प्रतिमा विश्व की सर्वाधिक ऊंची प्रतिमा...
भीमबेटका के प्राचीन शैलचित्र

भीमबेटका शैलाश्रय एवं प्रागैतिहासिक गुफा चित्र

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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से ४५ किलोमीटर दक्षिण की ओर, भोपाल-होशंगाबाद राजमार्ग पर भीमबेटका नामक विश्व धरोहर स्थल है। जब आप भोपाल से होशंगाबाद की ओर जा रहे हों तब आप अपने दाहिनी ओर...
कन्याकुमारी का सूर्योदय एवं सूर्यास्त

कन्याकुमारी के सर्वोत्तम दर्शनीय स्थल

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कन्याकुमारी का भ्रमण मेरा बहुत पुराना स्वप्न था। कदाचित उस समय से जब मैंने भारत के संदर्भ में ‘कश्मीर से कन्याकुमारी तक’ यह उक्ति सुनी थी। जहाँ तक कश्मीर का प्रश्न है, तो मैं...
रत्नागिरी महाविहार का सुसज्जित द्वार

उदयगिरी, रत्नागिरी एवं ललितगिरी- ओडिशा का बौद्ध इतिहास

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उदयगिरी, रत्नागिरी एवं ललितगिरी ओडिशा में प्राचीन बौद्ध धर्म की अंतिम स्मृतियाँ हैं। इन स्थलों का संबंध बौद्ध धर्म के उदय से भले ही ना हो किन्तु  बौद्ध धर्म के प्रसार में इनका निश्चित...

“चैती” एक ऋतु की लोक गायन शैली से परिचय

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हिन्दुस्तानी संगीत के तीन मुख्य स्वरूप है –लोक संगीत, शास्त्रीय संगीत और उपशास्त्रीय संगीत। 'लोक' शब्द संस्कृत के 'लोकदर्शने' धातु में 'घञ् प्रत्यय लगाकर बना है, जिसका अर्थ है - देखने वाला। साधारण जनता के...
जयपुर में क्या खरीदें

जयपुर राजस्थान जाएँ तो क्या क्या खरीद कर लायें?

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खरीददारी हेतु मेरे प्रिय स्थलों की सूची में जहां एक ओर पुरानी दिल्ली के बाजार हैं तो दूसरी ओर जयपुर के बाजारों का भी प्रमुख स्थान है। विभिन्न रंगों से परिपूर्ण जयपुर के बाजार...
शाही समाधान के मंदिर से शिखर

जींद रियासत की भूतपूर्व राजधानी- संगरूर के पर्यटक स्थल

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कल के बिना आज संभव नहीं। किन्तु आज केवल उनकी स्मृतियाँ ही शेष रह गई हैं। बीते हुए कल की स्मृतियाँ मन-मस्तिष्क में सदा के लिए घर कर जाती हैं। छोटे-बड़े नगरों की अनेक...
Ashtabhuja Sanjhi in Vrindavan

सांझी कला – ब्रज वृंदावन की पारंपरिक अलंकरण कला

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सांझी कला सांस्कृतिक रूप से धनी, ब्रज में प्रचलित अनेक कला क्षेत्रों में से एक है। भगवान कृष्ण से संबंधित सांस्कृतिक पृष्ठभूमि होने के फलस्वरूप ब्रज प्राचीन काल से ही विभिन्न लोक शैलियों का महत्वपूर्ण...
सम्राट अशोक का शिलालेख ३ री ईपू

सोपारा: मुंबई के पास स्थित मंदिर, पोत, तीर्थ एवं पर्यटक स्थल

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मुंबई भारत की वित्तीय राजधानी है। लोकप्रिय मान्यता यह कहती है कि मुंबई महानगर के यशस्वी इतिहास का आरंभ औपनिवेशिक काल के साथ होता है। किन्तु वास्तविकता यह है कि केवल आज के आधुनिक...

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