हैदराबाद में भारत का प्राचीनतम महापाषाण स्थल
जब भी हैदराबाद का उल्लेख हमारे सामने होता है तो सर्वप्रथम दम बिरयानी, ईरानी चाय, उस्मानिया बिस्कुट जैसे स्वादिष्ट व्यंजनों के स्मरण से मुंह में पानी आ जाता है। एक पल यदि अपनी जठराग्नि...
ओडिशा की प्राची घाटी के समृद्ध पुरातात्विक स्थलों की खोज में
प्राची घाटियों के मध्य से बहती प्राची नदी को भारत के पूर्व दिशा की सरस्वती कहा जाता है। रहस्यमयी सरस्वती सदियों पूर्व लुप्त हो चुकी है। किन्तु प्राची नदी, सीमित परिस्थितियों में ही सही,...
हर्वले गाँव – गोवा में पांडव गुफाएं, वल्लभाचार्य बैठक और जलप्रपात
गोवा के उत्तर गोवा जिले में स्थित बिचोली गाँव के आगे हर्वले नामक एक गाँव है। इसे अर्वलेम भी कहा जाता है। यहाँ स्थित, ६० फीट ऊंचा, बारहमासी जल-प्रपात एवं अनेक किवदंतियों से जुड़ा,...
हिमाचल का ताबो मठ- भित्तिचित्र, गुफाएं व शैलशिल्प
ताबो, मनमोहक स्पीति घाटी की गोद में विराजमान एक छोटा सा शांतिपूर्ण गाँव। स्पीति नदी के तीर स्थित यह गाँव पूर्व में लियो पार्गिल की चोटी तथा पश्चिम में मणिरंग से घिरा हुआ है।...
प्राचीन कान्हेरी गुफाएं मुंबई के संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में
मुझे जब कान्हेरी गुफाओं के विषय में जानकारी प्राप्त हुई थी, उसके पूर्व मुंबई के भीतर स्थित इन अद्भुत प्राचीन ऐतिहासिक गुफाओं के विषय में मैंने ना तो पढ़ा था, ना ही सुना था।...
मंदिरों क्यों जाएँ और कैसे जाएँ – श्री रामकृष्ण कोंगल्ला से जानें
अनुराधा गोयल: जैसा कि आप जानते हैं, मैंने अनेक मंदिरों के विषय में लिखा है। मुझे मंदिरों का भ्रमण करना अत्यंत भाता है। ना केवल आध्यात्मिक दृष्टि से, अपितु मंदिरों की वास्तुकला एवं शिल्पकला...
नवलगढ़ की पोद्दार हवेली एवं अन्य दर्शनीय स्थल
नवलगढ़ वह प्रथम शेखावटी नगरी है जिसके मैंने दर्शन किए थे। पुष्कर से झुंझुनू के निकट स्थित बागड़ जाते समय नवलगढ़ मेरा प्रथम पड़ाव था। आप यह कह सकते हैं कि अद्भुत शेखावटी हवेलियों...
एकला चलो रे – रवींद्रनाथ ठाकुर का सुप्रसिद्ध बंगला गीत
हम शांतिनिकेतन में थे। सम्पूर्ण वातावरण में ‘एकला चलो रे’ का स्वर गूंज रहा था। मैं कवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा स्थापित शांतिनिकेतन के प्रत्येक तत्व को देख रही थी एवं अनुभव कर रही थी।...
द्रौपदी का जन्मस्थान – प्राचीन पांचाल देश की राजधानी कांपिल्य
https://youtu.be/rMdVU0H17V0
नीरा मिश्र ‘द्रौपदी ड्रीम ट्रस्ट’ की संस्थापक, अभिभावक एवं अध्यक्षा हैं। वे गत दो दशकों से सामाजिक व्यवसायी हैं तथा प्राचीन भारतीय धरोहरों को पुनर्जीवित करने के शुभकार्य में व्यस्त हैं। दिल्ली अर्थात् इंद्रप्रस्थ...
ओडिशा के प्रसिद्द स्मृतिचिन्ह – भुवनेश्वर, पुरी एवं कोणार्क से क्या लाएं?
ओडिशा को लोग भारत के प्रसिद्ध सांस्कृतिक केंद्रों में से एक के रूप में कम ही जानते हैं। ओडिशा जैसे संस्कृति के धनी प्रदेश के प्रति यह अन्याय है। यहाँ हस्तकला द्वारा एक से...






















